भारतीय शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए करीब **84%** स्टॉकब्रोकर्स अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, यह तकनीक जहां प्रोफेशनल इनसाइट्स देने का दावा कर रही है, वहीं SEBI ने डेटा प्राइवेसी और ओवर-रिलायंस (अत्यधिक निर्भरता) को लेकर चेतावनी जारी की है।
रिटेल एनालिटिक्स का नया दौर
डीमैट अकाउंट्स और SIP की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के चलते ब्रोकरेज हाउसों के लिए डेटा का प्रबंधन करना मुश्किल होता जा रहा है। मैनुअल प्रोसेस अब पुरानी पड़ चुकी है, इसलिए मार्केट के दिग्गज अब AI और मशीन लर्निंग में बड़ा निवेश कर रहे हैं। इस बदलाव का मुख्य लक्ष्य रिटेल निवेशकों को इंस्टीट्यूशनल-ग्रेड डेटा और एनालिटिक्स मुहैया कराना है, ताकि भावनात्मक ट्रेडिंग (emotional decision-making) को कम किया जा सके।
रिस्क और SEBI की नजर
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी का खतरा भी बढ़ गया है। SEBI ने साफ किया है कि केवल एल्गोरिदम पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है और मानवीय हस्तक्षेप (human judgment) अनिवार्य है। इसके अलावा, 85% कंपनियां यह साबित करने में संघर्ष कर रही हैं कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए भारी खर्च का सही रिटर्न (ROI) मिल रहा है या नहीं।
गवर्नेंस की चुनौती
ब्रोकरेज हाउसों के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'जवाबदेही' तय करना है। यदि AI द्वारा दी गई किसी सलाह से निवेशक को नुकसान होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? कई फर्म अभी भी इस पर स्पष्ट गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनाने की प्रक्रिया में हैं। निवेशकों के लिए फिलहाल यही सलाह है कि वे तकनीक का इस्तेमाल करें, लेकिन अपने निवेश फैसलों पर खुद की नजर जरूर बनाए रखें।
