सितंबर तिमाही में शेयर बाजार में डेली इक्विटी टर्नओवर **11.7%** गिरकर **₹1.29 लाख करोड़** पर आ गया, लेकिन इसके बावजूद कई ब्रोकरेज फर्मों ने मुनाफा कमाया है। मार्जिन ट्रेडिंग और वेल्थ मैनेजमेंट के जरिए कंपनियों ने अपनी कमाई को सुरक्षित रखा है।
सितंबर तिमाही ने भारतीय ब्रोकरेज इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव पेश किया है, जहां फाइनेंशियल परफॉर्मेंस अब सिर्फ ट्रांजैक्शन कमीशन पर निर्भर नहीं रही है। भले ही मार्केट में सुस्ती रही और NSE-BSE पर कंबाइंड डेली टर्नओवर 11.7% गिरकर ₹1.29 लाख करोड़ पर आ गया, लेकिन बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों ने प्रॉफिट दर्ज किया। इस मजबूती के पीछे मुख्य वजह नॉन-ब्रोकिंग आय के साधनों पर शिफ्ट होना रहा, जिससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मार्केट की अस्थिरता का असर मुनाफे पर नहीं पड़ा।
मार्जिन ट्रेडिंग का बढ़ा दबदबा
इस प्रदर्शन के पीछे 'मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी' (MTF) का बड़ा हाथ है। इस सर्विस के जरिए ब्रोकर्स क्लाइंट्स को उधार देते हैं, जिससे बाजार की हलचल के बावजूद उन्हें स्थिर ब्याज (interest income) मिलती है। Angel One ने बताया कि उनका क्लाइंट फंडिंग बुक 40.5% बढ़कर ₹7,450 करोड़ पहुंच गया है। वहीं, Anand Rathi Share and Stock Brokers ने अपनी MTF बिजनेस से होने वाली ब्याज आय में 36% का उछाल दर्ज किया है। यह बदलाव कंपनियों के लिए एक ऐसा बफर है जो ट्रेडिंग वॉल्यूम की घटती-बढ़ती लहरों से प्रभावित नहीं होता।
SEBI के नियमों का असर
SEBI द्वारा लाए गए नए रेगुलेटरी बदलावों ने भी तिमाही पर असर डाला है। नए रूल्स के कारण ट्रेडिंग व्यवहार बदला है। उदाहरण के लिए, Groww जैसे प्लेटफॉर्म्स ने देखा कि उनके रिवेन्यू मिक्स में डेरिवेटिव ट्रेडिंग का योगदान पिछले साल के 57% से घटकर अब 45% रह गया है। यह स्पष्ट करता है कि नियम बदलने से डिजिटल-फर्स्ट ब्रोकर्स की कमाई का मॉडल सीधे प्रभावित होता है।
छोटे बनाम बड़े प्लेयर्स
सेक्टर में प्रदर्शन एक समान नहीं रहा। बड़ी टेक्नोलॉजी वाली कंपनियों और छोटे प्लेयर्स के बीच खाई बढ़ गई है। 5paisa Capital ने अपने नेट प्रॉफिट में 25.5% की गिरावट दर्ज की, जबकि Geojit Financial Services का मुनाफा सालाना आधार पर लगभग 26% घटा है। इससे साफ है कि अब सर्वाइवल के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डायवर्सिफाइड प्रोडक्ट्स होना अनिवार्य हो गया है। निवेशकों के लिए सबक साफ है—अब सिर्फ ट्रेडिंग कमीशन पर निर्भर रहने वाली कंपनियां पीछे छूट सकती हैं।
