Systematix Research की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बैंकों का नेट प्रॉफिट Q2 FY27 में **14.9%** तक बढ़ सकता है। इसकी मुख्य वजह **19%** की दमदार क्रेडिट ग्रोथ है, हालांकि बढ़ती डिपॉजिट कॉस्ट के कारण मार्जिन (NIM) पर दबाव देखने को मिल सकता है।
क्रेडिट ग्रोथ का इंजन
मुनाफे में इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण तेजी से बढ़ता लोन पोर्टफोलियो है। अगस्त 2026 तक सिस्टम-वाइड एडवांसेज में 19% की शानदार बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले साल के 11% के आंकड़े से काफी बेहतर है। सर्विसेज सेक्टर में लोन की मांग 24.3% और इंडस्ट्रियल सेक्टर में 18.2% बढ़ी है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत मांग को दर्शाती है।
मार्जिन पर क्यों है दबाव?
लोन की मांग बढ़ने के बावजूद बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में करीब 7 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट देखने को मिल सकती है। इसकी मुख्य वजह डिपॉजिट जुटाने की बढ़ती लागत है। दरअसल, बैंक अब टर्म डिपॉजिट्स पर ज्यादा निर्भर हैं और FCNR अकाउंट्स में बड़े इनफ्लो के कारण फंड जुटाना महंगा हो गया है। जब बैंक अपनी लोन यील्ड को इस बढ़ती लागत के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते, तो मार्जिन पर दबाव आना तय हो जाता है।
एसेट क्वालिटी और रिस्क
राहत की बात यह है कि बैंकों की एसेट क्वालिटी अब भी स्टेबल बनी हुई है। नए बैड लोंस (slippages) स्थिर हैं या उनमें मामूली गिरावट देखी जा रही है, जिससे क्रेडिट कॉस्ट कंट्रोल में है। हालांकि, निवेशकों को नॉन-इंटरेस्ट इनकम पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि सरकारी सिक्योरिटीज पर यील्ड बढ़ने से ट्रेडिंग गेन्स सीमित रह सकते हैं।
Q2 नतीजों के दौरान, मैनेजमेंट की कमेंट्री डिपॉजिट कॉम्पिटिशन और मार्जिन स्टैबिलाइजेशन की रणनीति पर निवेशकों का खास फोकस रहेगा। इसके साथ ही, 80.8% का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो बैंकों की वर्किंग एफिशिएंसी को समझने का एक महत्वपूर्ण पैमाना होगा।
