भारतीय बैंकों के Q2 रिजल्ट्स आने वाले हैं, जिनमें **11%** की ग्रोथ का अनुमान है। हालांकि, भारी FCNR डिपॉजिट्स के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन में **10 से 20 बेसिस पॉइंट्स** की गिरावट देखने को मिल सकती है।
प्राइवेट बैंकों का दबदबा जारी
फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजों में बैंकिंग सेक्टर में काफी अंतर देखने को मिल सकता है। प्राइवेट सेक्टर के बैंक शानदार प्रदर्शन करते हुए 20% की ग्रोथ दिखा सकते हैं, जबकि पब्लिक सेक्टर यानी सरकारी बैंकों के नतीजे सुस्त रहने की संभावना है। यह अंतर बैंकों की परिचालन लागत और लोन बुक को मैनेज करने की अलग-अलग क्षमता को दर्शाता है।
FCNR डिपॉजिट्स का असर
मार्जिन पर दबाव की मुख्य वजह FCNR (Foreign Currency Non-Resident) डिपॉजिट्स हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की एक स्पेशल विंडो के जरिए बैंकों ने लगभग USD 133 बिलियन जुटाए थे। समस्या यह है कि बैंक इस बड़ी रकम को अभी तक पूरी तरह से ज्यादा ब्याज वाले लोन में नहीं बदल पाए हैं, जिससे मार्जिन पर 10 से 20 बेसिस पॉइंट्स का दबाव बन गया है।
एसेट क्वालिटी और रिस्क
बैंकिंग सिस्टम में एसेट क्वालिटी फिलहाल स्थिर बनी हुई है, जो निवेशकों के लिए राहत की बात है। हालांकि, माइक्रोफाइनेंस और असुरक्षित रिटेल लोन (Unsecured Retail Loans) जैसे क्षेत्रों में थोड़ा तनाव है। अगर इन सेगमेंट में और दबाव बढ़ा, तो क्रेडिट कॉस्ट अस्थिर हो सकती है।
आगे की राह (H2 Outlook)
साल की दूसरी छमाही में मार्जिन के रिकवर होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे बैंक इस लिक्विडिटी को लोन बुक में निवेश करेंगे और महंगे फंडिंग सोर्सेज पर निर्भरता कम करेंगे, वैसे-वैसे मार्जिन को सपोर्ट मिलेगा। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि बैंक 18.8% की क्रेडिट ग्रोथ को कैसे बनाए रखते हैं।
