त्योहारी सीजन से पहले ऑटोमोबाइल सेक्टर में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है, जहां अगस्त में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री **37%** बढ़ गई है। हालांकि, यूटिलिटी व्हीकल्स की डिमांड से मिली इस बढ़त के बावजूद, ग्लोबल टेंशन और बढ़ती इनपुट कॉस्ट कंपनियों के मुनाफे के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।
त्योहारी सीजन के चलते ऑटो कंपनियां अभी डीलर के पास अपना स्टॉक भर रही हैं, जिससे होलसेल नंबर्स में उछाल दिख रहा है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले साल के ऊंचे बेस (Base) के कारण जल्द ही ग्रोथ की रफ्तार सामान्य हो सकती है। मौजूदा आंकड़े मार्केट की परमानेंट डिमांड नहीं, बल्कि एडवांस स्टॉक की कहानी कह रहे हैं।
SUV का जलवा
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट इस ग्रोथ का मुख्य इंजन बना हुआ है। अगस्त 2026 में इस सेगमेंट ने 37% की सालाना ग्रोथ दर्ज की है। खास बात यह है कि यूटिलिटी व्हीकल्स की मार्केट हिस्सेदारी बढ़कर 69% हो गई है, जो पिछले साल 65% थी। निवेशकों के लिए यह संकेत साफ है कि जिन ऑटो कंपनियों के पास मजबूत SUV पोर्टफोलियो है, वे बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने में सफल रहेंगी।
टू-व्हीलर मार्केट की मिली-जुली तस्वीर
दोपहिया वाहनों का हाल थोड़ा सुस्त है। घरेलू बाजार में इंटरनल कम्बशन इंजन टू-व्हीलर्स की बिक्री सिर्फ 5% बढ़ी है। बाजार में अब साफ विभाजन दिख रहा है—एंट्री-लेवल मॉडल्स के मुकाबले 150cc से 250cc और उससे ऊपर की प्रीमियम मोटरसाइकिल्स की मांग कहीं ज्यादा मजबूत है।
मार्जिन पर दबाव का रिस्क
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से सप्लाई चेन में बाधा और कमोडिटी की कीमतों में उछाल ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऑटो कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल पाएंगी? अगर कीमतें बढ़ाने के बाद भी डिमांड बरकरार रहती है, तभी मार्जिन सुरक्षित रह पाएगा। आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि फेस्टिव सीजन के बाद क्या डिमांड का यह लेवल बना रहता है या इसमें कोई गिरावट आती है।
