ट्रेड डील का असर और बजट की गूँज
3 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच हुए एक अहम ट्रेड डील की घोषणा के बाद भारतीय इक्विटी मार्केट में जबरदस्त उछाल देखा गया। इस समझौते में अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगने वाले 50% टैरिफ को घटाकर 18% करने का ऐलान किया गया, जिसे भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस (export competitiveness) बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। इस खबर का तुरंत असर यह हुआ कि Nifty 50 इंडेक्स में बड़ी तेजी आई और यह लगभग 25,728 के स्तर पर बंद हुआ। इस पॉजिटिव सेंटीमेंट ने 1 फरवरी 2026 को पेश हुए यूनियन बजट (Union Budget) की शुरुआती निगेटिव प्रतिक्रिया को भी फीका कर दिया, जब डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांज़ैक्शन टैक्स (Securities Transaction Tax) में बढ़ोतरी के कारण Nifty 50 24,825.45 तक गिर गया था। यह ताजा तेजी इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस (investor confidence) पर ट्रेड डील के भारी प्रभाव को दर्शाती है।
वैल्यूएशन प्रीमियम और अलग-अलग चाल
हालिया पॉजिटिव मोमेंटम के बावजूद, Nifty 50 फिलहाल एक वैल्यूएशन प्रीमियम (valuation premium) पर ट्रेड कर रहा है, जिसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 22.4 से 25 के बीच है। इसकी तुलना MSCI इमर्जिंग मार्केट्स (MSCI Emerging Markets) इंडेक्स के लगभग 17 के P/E रेश्यो से की जाए तो यह दिखाता है कि मौजूदा मार्केट मल्टीपल्स (market multiples) थोड़े स्ट्रेच्ड (stretched) हो सकते हैं। जहां Nifty 50 मजबूती दिखा रहा है, वहीं ब्रॉडर मार्केट इंडिसेज (broader market indices) में थोड़ी मिली-जुली चाल देखने को मिल रही है। Nifty मिड-कैप 100 (Nifty MidCap 100) इंडेक्स करीब 59,307 पर और Nifty स्मॉल-कैप 100 (Nifty SmallCap 100) इंडेक्स लगभग 16,989 पर ट्रेड कर रहा है। ऐतिहासिक रूप से, 2025 में इंडियन इक्विटीज ने ग्लोबल पीयर्स (global peers) से पिछड़कर प्रदर्शन किया था, और स्मॉल व मिड-कैप सेगमेंट्स को फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर (FPI) आउटफ्लो और लिक्विडिटी प्रेशर (liquidity pressure) का सामना करना पड़ा था, भले ही डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स (domestic investors) की दिलचस्पी बढ़ रही थी। छोटे कैपिटलाइजेशन (capitalization) वाले स्टॉक्स में यह अंतर्निहित सावधानी, Nifty की हालिया बढ़त के विपरीत है।
सेक्टर की बात करें तो, मार्केट की पॉजिटिव प्रतिक्रिया ब्रॉड-बेस्ड (broad-based) थी, जिसमें रिएल्टी (Realty), इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और एनर्जी (Energy) सेक्टरों में मजबूती देखी गई। वहीं, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर ने ब्रॉडर मार्केट की तुलना में अंडरपरफॉरमेंस (underperformance) दिखाई।
एनालिस्ट की राय और टेक्निकल लेवल्स
मिरे एसेट शेयरखान (Mirae Asset ShareKhan) के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट (Technical Analyst) कुणाल शाह (Kunal Shah) ने भारतीय इंडिसेज के लिए कुछ अहम टेक्निकल लेवल्स (technical levels) बताए हैं। Nifty 50 के लिए, 25,440 का स्तर, जो बजट डे (Budget Day) का हाई था, अब एक महत्वपूर्ण सपोर्ट फ्लोर (support floor) बन गया है। तत्काल रेजिस्टेंस (resistance) 25,900–26,000 के जोन में है, और एक निर्णायक ब्रेकआउट (breakout) इसे 26,500–26,700 की ओर ले जा सकता है।
Nifty मिड-कैप 100 को तत्काल 60,450 पर एक हर्डल (hurdle) का सामना करना पड़ेगा। इस स्तर से ऊपर एक सस्टेन्ड मूव (sustained move) बुलिश शिफ्ट (bullish shift) का संकेत देगा, हालांकि निकट भविष्य में 58,600–60,450 के रेंज में कंसॉलिडेशन (consolidation) की उम्मीद है। Nifty स्मॉल-कैप 100, जो अधिक सतर्क अंडरटोन (undertone) दिखा रहा है, के लिए तत्काल अपसाइड हर्डल्स 17,500 और 18,000 हैं, जबकि एक क्रिटिकल सपोर्ट लेवल 16,200 पर है, जिसके नीचे इंडेक्स 15,000 के साइकोलॉजिकल लेवल (psychological level) को टेस्ट कर सकता है। निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या मौजूदा रैली की चौड़ाई (breadth) बढ़ती है या यह कंसन्ट्रेटेड (concentrated) रहती है, खासकर प्रीमियम वैल्यूएशंस (premium valuations) और लार्ज-कैप स्ट्रेंथ (strength) व मिड/स्मॉल-कैप कॉशन (caution) के बीच जारी डाइवर्जेंस (divergence) को देखते हुए।