अगस्त 2026 में भारत के बड़े पोर्ट्स के वॉल्यूम में सालाना आधार पर **7%** की बढ़ोतरी देखी गई है। इस तेजी में एक्सपोर्ट-इंपोर्ट ट्रेड का **18%** योगदान रहा। जहां एक तरफ मैरीटाइम एक्टिविटी रफ्तार पकड़ रही है, वहीं इंडियन रेलवे के कंटेनर ट्रैफिक में **3%** की गिरावट आई है। इस बीच, Adani Ports ने **19%** वॉल्यूम ग्रोथ के साथ पूरे सेक्टर को पीछे छोड़ दिया है।
अगस्त 2026 के आंकड़ों से भारतीय लॉजिस्टिक्स सेक्टर की नई तस्वीर सामने आई है। भले ही फरवरी से ग्लोबल शिपिंग लागत 132% तक बढ़ गई हो, लेकिन भारतीय समुद्री हब दबाव को संभालने में कामयाब रहे हैं।
कार्गो की स्थिति और आंकड़े
आंकड़ों पर नजर डालें तो आयरन ओर एक्सपोर्ट्स में 30% का भारी उछाल दिखा है। वहीं, कोल हैंडलिंग और कंटेनर वॉल्यूम में क्रमशः 6% और 10% की बढ़त दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि ग्लोबल शिपिंग की महंगी दरों के बावजूद कच्चे माल और मैन्युफैक्चर्ड गुड्स की मांग बनी हुई है।
Adani Ports और लॉजिस्टिक्स का विरोधाभास
Adani Ports and Special Economic Zone Limited ने इंडस्ट्री के औसत को पछाड़ते हुए 19% की ग्रोथ हासिल की है। यह कंपनी की इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को दर्शाता है। वहीं, दूसरी ओर रेल नेटवर्क का प्रदर्शन फीका रहा, जिसमें 3% की गिरावट आई। जानकारों का मानना है कि सप्लाई चेन में आ रहे बदलाव रेल फ्रेट को ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं।
सड़क परिवहन और क्षेत्रीय बदलाव
घरेलू स्तर पर रोड लॉजिस्टिक्स काफी मजबूत है। भारी कमर्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन में 40% का उछाल और सितंबर की शुरुआत में फ्रेट टैरिफ में 2% की बढ़ोतरी यह बताती है कि रोड ट्रांसपोर्ट अब मुख्य आधार बनता जा रहा है।
क्षेत्रीय प्रदर्शन में ओडिशा के पोर्ट्स ने 39% ग्रोथ के साथ टॉप किया है, जबकि महाराष्ट्र में 8% का उछाल दिखा है। निवेश के नजरिए से देखें तो अमेरिका को होने वाले शिपमेंट में 22% की वृद्धि हुई है, जबकि यूएई और सऊदी अरब के साथ ट्रेड में 17% से 26% की गिरावट आई है। भविष्य की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी बाजार की मांग मिडिल ईस्ट की सुस्ती की भरपाई कर पाती है या नहीं।
