साल 2026 में भारतीय IPO मार्केट में जबरदस्त हलचल देखी गई है। अब तक 84 मेनबोर्ड इश्यूज के जरिए **₹1.10 लाख करोड़** से ज्यादा जुटाए गए हैं, लेकिन अब निवेशकों का रुख 'ग्रोथ स्टोरी' से हटकर 'प्रॉफिट की असलियत' की ओर मुड़ रहा है।
साल 2026 का भारतीय प्राइमरी मार्केट काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। 84 मेनबोर्ड कंपनियों ने अब तक ₹1.10 लाख करोड़ की पूंजी जुटाई है। हालांकि, बाजार का मिजाज अब बदल रहा है। पहले जो निवेशक केवल भविष्य की ग्रोथ के वादे पर पैसा लगा रहे थे, वे अब कंपनी के फंडामेंटल्स और असल मुनाफे पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
वैल्यूएशन पर सवाल
खासकर स्मॉल और मिड-कैप (SMID) सेगमेंट में वैल्यूएशन अब ऐसे स्तर पर पहुंच गई है जहां निवेशकों को निरंतर और हाई-क्वालिटी अर्निंग ग्रोथ की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस जैसे सेक्टर्स में जहां पहले भारी उत्साह था, अब वहां 'बैलेंस शीट' की सच्चाई सामने आने लगी है। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में बाजार में आई वोलेटिलिटी इसका बड़ा संकेत है, जहां छोटे शेयरों में बिकवाली देखी गई।
OFS का पेच
बाजार में एक बड़ी बहस 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) को लेकर है। ज्यादातर IPOs में पैसा कंपनी के विस्तार या नई मशीनरी में नहीं, बल्कि मौजूदा प्रमोटर्स और अर्ली इन्वेस्टर्स की जेब में जा रहा है। इसका मतलब यह है कि कंपनी को अपनी ग्रोथ के लिए खुद की काबिलियत पर ही निर्भर रहना होगा।
निवेशकों के लिए सावधानी
अक्टूबर में लिस्ट हुए कई IPO अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। आने वाले समय में 'लॉक-इन' पीरियड खत्म होने के बाद और भी बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे किसी भी कंपनी के कर्ज के लेवल और यह जरूर देखें कि क्या पैसा बिजनेस में निवेश हो रहा है या सिर्फ मौजूदा शेयरहोल्डर्स को एग्जिट (exit) दिलाया जा रहा है।
