ITC Share Price: सिगरेट बिजनेस पर टैक्स का डबल अटैक, ब्रोकरेज ने घटाया टारगेट

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AuthorMehul Desai|Published at:
ITC Share Price: सिगरेट बिजनेस पर टैक्स का डबल अटैक, ब्रोकरेज ने घटाया टारगेट
Overview

ITC के शेयरधारकों के लिए बुरी खबर है। एक बड़ी ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने ITC के टारगेट प्राइस को घटाकर **₹302** कर दिया है और स्टॉक को 'Reduce' रेटिंग दी है। फर्म का मानना है कि सिगरेट पर बढ़ी एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) से कंपनी के वॉल्यूम और मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा।

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सिगरेट बिजनेस पर एक्साइज ड्यूटी का भारी बोझ

Prabhudas Lilladher ने ITC पर अपनी कवरेज की शुरुआत 'Reduce' रेटिंग और ₹302 के टारगेट प्राइस के साथ की है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि हाल ही में सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी में हुई बढ़ोतरी से कंपनी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इस बढ़ोतरी और इसके बाद कीमतों में हुए बदलावों का बिक्री वॉल्यूम और मुनाफे पर असर अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है, जो ITC के सिगरेट बिजनेस के लिए एक बड़ी चुनौती है। 31 दिसंबर 2025 को घोषित एक्साइज ड्यूटी के कारण कीमतों में लगभग 60% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे तंबाकू सेक्टर में चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बढ़ोतरी से अवैध व्यापार बढ़ने और किसानों व खुदरा विक्रेताओं पर वित्तीय दबाव आने की आशंका जताई जा रही है।

FMCG और पेपरबोर्ड सेगमेंट से ग्रोथ की उम्मीद

सिगरेट बिजनेस की चुनौतियों के विपरीत, ITC के फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) और पेपरबोर्ड डिवीजन को ग्रोथ के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में देखा जा रहा है। FMCG सेगमेंट से अच्छा प्रदर्शन जारी रहने की उम्मीद है, हालांकि मध्यम अवधि में प्रॉफिट मार्जिन पर कुछ दबाव संभव है। पेपर और पेपरबोर्ड बिजनेस का विस्तार होने की उम्मीद है, जिसमें मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस (MIP) जैसे उपायों और लकड़ी की कम लागत का फायदा मिलेगा। ई-कॉम्वर्स और फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री से इस सेगमेंट की मांग को सपोर्ट मिल रहा है। ITC अपने नॉन-टोबैको (Non-tobacco) प्रोडक्ट्स के विस्तार पर भी ध्यान दे रही है, जिसमें हेल्थ फूड ब्रांड 'Yoga Bar' की पैरेंट कंपनी Sproutlife Foods का पूरा अधिग्रहण करने की योजना शामिल है।

वैल्यूएशन और एनालिस्ट का नजरिया

Prabhudas Lilladher ने वित्तीय वर्ष 2026-2028 के लिए अर्निंग्स पर शेयर (EPS) कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 4.8% रहने का अनुमान लगाया है, जिसमें Century Paper का प्रदर्शन शामिल नहीं है। ₹302 का टारगेट प्राइस सम-ऑफ-द-पार्ट्स (SOTP) वैल्यूएशन पर आधारित है। 'Reduce' रेटिंग का मुख्य कारण सिगरेट सेगमेंट पर एक्साइज ड्यूटी के बदलावों का लगातार प्रभाव है, जो अभी भी मुनाफे का एक बड़ा स्रोत है। ITC का मौजूदा P/E रेश्यो लगभग 18.8x है, जो इसके तंबाकू बिजनेस की स्थिरता और रेगुलेटरी जोखिमों के बारे में बाजार की चिंताओं को दर्शाता है। यह वैल्यूएशन इसके 10-साल के औसत P/E रेश्यो 22.21 से भी कम है, जिस कारण कुछ एनालिस्ट इसे 'वैल्यू ट्रैप' (Value Trap) के रूप में देख रहे हैं।

मार्केट पोजिशन और पिछली ट्रेंड्स

एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी के बाद, ITC का सिगरेट बिजनेस, जो लीगल सिगरेट मार्केट का लगभग 77% हिस्सा रखता है, मुश्किल हालात का सामना कर रहा है। Godfrey Phillips India जैसे प्रतिस्पर्धी भी कीमतें बढ़ा रहे हैं, जिसमें Pocket Marlboro अब ₹70 के बजाय ₹85 में मिल रहा है। ऐतिहासिक रूप से, वित्तीय वर्ष 2014-2016 के बीच एक्साइज ड्यूटी में हुई बड़ी बढ़ोतरी के बाद ITC को कीमतों में मिड-टीन परसेंट की बढ़ोतरी के बाद वॉल्यूम में 15% से अधिक की गिरावट का सामना करना पड़ा था। एनालिस्ट्स का मानना है कि मौजूदा मूल्य समायोजन से वॉल्यूम में इसी तरह की कमी आ सकती है, खासकर जब उपभोक्ता सस्ते या अवैध उत्पादों की ओर रुख कर सकते हैं। वहीं, भारतीय FMCG सेक्टर में 2025 से 2035 तक 5.62% CAGR की ग्रोथ का अनुमान है, जो बढ़ते शहरीकरण और आय से प्रेरित है। हालांकि, तंबाकू सेगमेंट की ग्रोथ सीधे तौर पर विशिष्ट टैक्स नीतियों से प्रभावित होती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.