भारतीय लार्ज-कैप IT कंपनियों के लिए दूसरी तिमाही का दौर काफी चुनौती भरा रहने वाला है। 8 अक्टूबर से शुरू हो रहे अर्निंग सीजन में रेवेन्यू ग्रोथ सुस्त रहने का अनुमान है, जिससे बाजार में हलचल है। Nifty IT इंडेक्स में अब तक **25%** से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
भारतीय IT सेक्टर इस समय फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के कठिन दौर से गुजर रहा है। 8 अक्टूबर को Tata Consultancy Services (TCS) के नतीजों के साथ इसकी शुरुआत होगी। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस बार कंपनियों की कॉन्स्टेंट-करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ महज 0.5% से 3.0% के बीच रह सकती है, जो हाल के वर्षों की सबसे सुस्त परफॉर्मेंस हो सकती है।
गाइडेंस और ग्रोथ की चुनौतियां
IT सेक्टर की सबसे बड़ी समस्या ग्लोबल क्लाइंट्स के खर्चों में कटौती है। कंपनियां अपने discretionary खर्च को कम कर रही हैं या फैसले टाल रही हैं। इसके अलावा, 'AI डिफ्लेशन' का दौर भी शुरू हो गया है, जहाँ AI टूल्स मानव श्रम की जगह ले रहे हैं, जिससे प्रति प्रोजेक्ट रेवेन्यू पर असर पड़ा है। इसके चलते Infosys और HCL Technologies जैसी दिग्गजों के सालाना रेवेन्यू गाइडेंस पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
वैल्यूएशन पर दबाव
IT सेक्टर की खराब हालत का असर मार्केट पर साफ दिख रहा है। Nifty IT इंडेक्स 2026 की शुरुआत से 25% से ज्यादा टूट चुका है, जिसमें पिछले एक महीने में ही 9% की गिरावट आई है। अब निवेशकों को इस बात का डर सता रहा है कि क्या इन कंपनियों का मौजूदा वैल्यूएशन (P/E मल्टीपल) और भी गिरेगा।
आने वाले दिनों में TCS, HCL Technologies, Wipro और Tech Mahindra के नतीजों के साथ मैनेजमेंट की कमेंट्री अहम होगी। देखना यह होगा कि ये कंपनियां वेज प्रेशर के बीच अपने मार्जिन को कैसे सुरक्षित रखती हैं और AI के दौर में खुद को कैसे ढालती हैं।
