IRCTC पर एक प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ने कवरेज शुरू की है और शेयर के लिए **₹560** का टारगेट प्राइस तय किया है। कंपनी की डिजिटल टिकटिंग में मजबूत पकड़ और प्रीमियम ट्रेनों की बढ़ती लोकप्रियता इसके ग्रोथ का मुख्य आधार बनी हुई है।
ग्रोथ की नई कहानी
IRCTC अब सिर्फ एक टिकटिंग प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक व्यापक मोबिलिटी प्लेटफॉर्म बनने की ओर कदम बढ़ा रही है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2028 और 2029 की अनुमानित कमाई पर 25x मल्टीपल का इस्तेमाल करके यह टारगेट प्राइस सेट किया है।
टिकटिंग में दबदबा और आगे की रणनीति
कंपनी का इंटरनेट टिकटिंग पोर्टल आज भारत में कुल रिजर्व्ड ट्रेन बुकिंग का 89% हिस्सा संभालता है, जिससे एक स्टेबल रेवेन्यू स्ट्रीम बनी रहती है। कंपनी अब विज्ञापन (Advertising) और क्रॉस-सेलिंग के जरिए इस बड़े यूजर बेस से कमाई करने की तैयारी में है। IRCTC एक ऐसा 'यूनिफाइड ट्रैवल ऐप' लाने की योजना बना रही है, जिसमें रेल, बस, एयर और होटल बुकिंग एक ही जगह उपलब्ध होगी। हालांकि, निजी ट्रैवल एग्रीगेटर्स के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा इस रणनीति की सफलता तय करेगी।
प्रीमियम सेवाओं का फायदा
वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों की बढ़ती संख्या ने कंपनी के रेवेन्यू मिक्स को बेहतर बनाया है। आज कुल रेल ट्रैफिक में एयर-कंडीशंड सफर की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा हो गई है, जिससे कंपनी को कन्वेनिएंस फीस और कैटरिंग से अधिक कमाई हो रही है।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
निवेशकों को कुछ महत्वपूर्ण बातों पर नजर रखनी चाहिए:
- रेल नीर (Rail Neer): पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर डिवीजन में क्षमता की कमी मांग के मुकाबले एक बड़ी बाधा है।
- सरकारी नीति: कंपनी का सीधा संबंध मिनिस्ट्री ऑफ रेलवेज से है। कन्वेनिएंस फीस शेयरिंग और कैटरिंग प्राइसिंग में सरकारी बदलाव सीधे मार्जिन को प्रभावित कर सकते हैं।
कंपनी के भविष्य की राह उसके नए बिजनेस वर्टिकल्स को स्केल करने और सरकारी रेगुलेशंस के बीच मुनाफे को बनाए रखने पर टिकी है।
