IDBI Capital का मानना है कि भारतीय IT सेक्टर के लिए दूसरी तिमाही (Q2) सुस्त रहने वाली है, जहां लार्ज-कैप कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ महज **1%** रहने का अनुमान है। अनिश्चितता के इस माहौल में ब्रोकरेज ने TCS और HCLTech को निवेश के लिए चुना है।
भारतीय IT सेक्टर अपनी दूसरी तिमाही के नतीजों के लिए कमर कस रहा है, जिसकी शुरुआत 8 अक्टूबर, 2026 को Tata Consultancy Services (TCS) के साथ होगी। नतीजों से पहले IDBI Capital की रिपोर्ट ने सेक्टर के लिए चिंता जाहिर की है, जिसमें लार्ज-कैप कंपनियों की डॉलर रेवेन्यू ग्रोथ 1% के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है।
मार्जिन पर राहत की उम्मीद
मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितता और धीमी डील कन्वर्जन के कारण भले ही टॉप-लाइन ग्रोथ सीमित है, लेकिन ब्रोकरेज को प्रॉफिट मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। रुपये में कमजोरी और हालिया वेज-हाइक (Wage-hike) के दबाव कम होने से मुनाफे में कुछ राहत मिल सकती है।
TCS और HCLTech बने पसंद
ब्रोकरेज ने लार्ज-कैप स्पेस में HCLTech को मोमेंटम के लिहाज से टॉप पिक माना है। अनुमान है कि HCLTech की डॉलर रेवेन्यू में 3% की बढ़त हो सकती है और ऑपरेटिंग मार्जिन 74 बेसिस पॉइंट बढ़कर 17.6% तक पहुंच सकता है। इसमें HPE टेलीकॉम और Jaspersoft का योगदान अहम होगा। वहीं, TCS के लिए रेवेन्यू में 0.5% की तिमाही बढ़ोतरी और EBIT मार्जिन में 44 बेसिस पॉइंट का सुधार होकर यह 24.4% तक पहुंचने की उम्मीद है। कंपनी की AI-इंटीग्रेटेड सर्विसेज मांग को स्थिर बनाए रखने में मदद कर रही हैं।
सेक्टर का जोखिम और मिड-कैप पर नजर
ब्रॉडर IT लैंडस्केप अभी भी सतर्क है। रिपोर्ट के अनुसार, Infosys पर प्राइसिंग का दबाव बना हुआ है, जबकि Wipro अपने इंटरनल ग्रोथ के मोर्चे पर संघर्ष कर रही है। मिड-कैप कंपनियों जैसे Coforge और Sonata Software की ग्रोथ के आंकड़े लार्ज-कैप से बेहतर दिख सकते हैं, लेकिन ब्रोकरेज का कहना है कि यह बढ़त अक्सर अधिग्रहणों (Acquisitions) की वजह से होती है, इसलिए निवेशकों को 'ऑर्गेनिक सस्टेनेबिलिटी' पर ध्यान देने की जरूरत है।
