ICRA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियां फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी छमाही में शानदार क्रेडिट हेल्थ के साथ आगे बढ़ रही हैं। इनका क्रेडिट रेशियो **3.2** गुना पर बना हुआ है, लेकिन महंगाई और कच्चे तेल के बढ़ते दाम निवेशकों की चिंता बढ़ा सकते हैं।
रेटिंग एजेंसी ICRA के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय कॉर्पोरेट जगत ने चालू फाइनेंशियल ईयर के दूसरे हाफ में मजबूत बैलेंस शीट के साथ कदम रखा है। कंपनी के अपग्रेड और डाउनग्रेड के बीच का अंतर यानी 'क्रेडिट रेशियो' 3.2 गुना है, जो कि 1.5 के 10-वर्षीय औसत से कहीं ज्यादा बेहतर है। इतना ही नहीं, सालाना डाउनग्रेड रेट गिरकर 4% के मल्टी-ईयर लो पर आ गया है।
किन सेक्टरों का रहा दबदबा?
इस मजबूती के पीछे मुख्य रूप से पावर, रियल एस्टेट, ऑटो कंपोनेंट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर रहे हैं। इन क्षेत्रों ने कुल अपग्रेड्स में लगभग 50% हिस्सेदारी निभाई है। लगातार डिमांड और ऑपरेशनल स्टेबिलिटी ने इन सेक्टरों को मंदी के दौर में भी बचाए रखा है।
निवेशकों के लिए चेतावनी के संकेत
हालांकि, तस्वीर पूरी तरह गुलाबी नहीं है। मैक्रो-इकोनॉमिक मोर्चे पर कई चुनौतियां खड़ी हैं:
- महंगाई का असर: रिटेल महंगाई इस साल औसतन 5% रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 2.1% से काफी ज्यादा है। इसे थामने के लिए ICRA ने सेंट्रल बैंक द्वारा साल के अंत तक रेपो रेट में 25-25 बेसिस पॉइंट्स की दो बार बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
- कच्चा तेल: क्रूड ऑयल की कीमतें $116 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे इंडस्ट्री का इनपुट कॉस्ट बढ़ रहा है।
- रूरल कंजम्पशन: मानसून की अनियमितता के कारण जलाशयों का जलस्तर 71% ही बचा है, जो पिछले साल 90% था। यह कृषि पैदावार पर असर डाल सकता है।
- ग्लोबल रिस्क: पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल अस्थिरता से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। साथ ही, फार्मा सेक्टर के लिए अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी में बदलाव (टैरिफ 200% तक होने की अटकलें) एक बड़ा सरदर्द साबित हो सकता है।
इन तमाम दबावों के चलते, फुल ईयर GDP ग्रोथ का अनुमान भी 7.8% से घटाकर 7.1% कर दिया गया है। फिलहाल, निवेशकों को कंपनियों के मुनाफे पर बढ़ते कॉस्ट का असर और इंटरेस्ट रेट की चाल पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
