ICICI Securities ने Power Finance Corporation (PFC) पर अपनी 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है और शेयर के लिए ₹520 का टारगेट प्राइस तय किया है। कंपनी का प्रॉफिट 5% बढ़ा है, वहीं निवेशक REC के साथ प्रस्तावित मर्जर और हालिया डिविडेंड की घोषणाओं पर भी नजर बनाए हुए हैं।
ICICI Securities का भरोसा बरकरार
ICICI Securities ने Power Finance Corporation (PFC) पर अपना 'Buy' रेटिंग बनाए रखा है और शेयर के लिए ₹520 का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि पावर फाइनेंसिंग सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद, कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है। यह आकलन कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों के बाद आया है, जो उम्मीदों के अनुरूप रहे हैं।
PFC की पहली तिमाही के नतीजे
Power Finance Corporation ने 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ₹47.5 अरब (लगभग) का आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 5% की बढ़ोतरी है। प्रॉफिट में यह वृद्धि क्रेडिट कॉस्ट में हुए रिवर्सल (reversal) के कारण संभव हुई, जिसका सीधा मतलब है कि कंपनी को उन फंड्स को जारी करने से फायदा हुआ है जिन्हें पहले संभावित बैड लोन के लिए अलग रखा गया था। हालांकि, कुल प्रॉफिट में वृद्धि के बावजूद, निवेशक लोन डिस्बर्समेंट जैसे ऑपरेशनल ट्रेंड्स पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, जो कि प्रतिस्पर्धी लेंडिंग माहौल के कारण कुछ दबाव में हैं।
REC के साथ मर्जर पर सबकी निगाहें
शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ी खबर PFC और REC के प्रस्तावित मर्जर को लेकर है। ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, इस मर्जर को 1 अप्रैल, 2027 तक लागू करने का लक्ष्य है। योजना के तहत, 88 PFC शेयर्स के बदले 100 REC शेयर्स का स्वैप रेशियो (swap ratio) तय किया गया है। उम्मीद है कि दोनों कंपनियों के विलय के बाद बनने वाली नई इकाई का लोन बुक ₹11 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा। हालांकि, इस मर्जर को सफल बनाने के लिए जरूरी रेगुलेटरी और स्टैच्यूटरी अप्रूवल (statutory approvals) अभी बाकी हैं, जिन पर बाजार की खास नजर रहेगी।
डिविडेंड और अन्य अपडेट्स
मर्जर की डेवलपमेंट के साथ-साथ, कंपनी ने ₹3.90 प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड (interim dividend) भी घोषित किया है। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 27 अगस्त, 2026 तय की गई है। यह शेयरधारकों के लिए एक स्पष्ट, शॉर्ट-टर्म इवेंट है।
कंपनी के सामने चुनौतियां
ब्रोकरेज की सकारात्मक राय के बावजूद, कंपनी के सामने कुछ जोखिम भी हैं। यह सेक्टर वर्तमान में रीफाइनेंसिंग (refinancing) के लिए तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, जो लेंडिंग मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा, नए लोन डिस्बर्समेंट की गति कुछ धीमी रही है, और कंपनी को अपनी ग्रोथ को बनाए रखने के लिए प्रीपेमेंट प्रेशर (prepayment pressures) को प्रभावी ढंग से मैनेज करना होगा। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी इन ऑपरेशनल चुनौतियों और आने वाले मर्जर की जटिलताओं का प्रबंधन कैसे करती है।
