ICICI Securities ने India Shelter Finance Corporation (ISFC) पर अपना भरोसा बरकरार रखते हुए 'Buy' रेटिंग दी है और शेयर के लिए ₹1,125 का टारगेट प्राइस तय किया है। हालांकि, अकाउंटिंग पॉलिसी में बदलाव के कारण कंपनी के लोन डिस्बर्समेंट में **28%** की गिरावट दर्ज की गई, पर पहली तिमाही में नेट प्रॉफिट **20%** बढ़ा है।
ICICI Securities का ISFC पर बुलिश नज़रिया
दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities ने India Shelter Finance Corporation (ISFC) को लेकर अपना आशावादी रुख बनाए रखा है। कंपनी ने ISFC के शेयर पर 'Buy' रेटिंग की पुष्टि की है और इसके लिए ₹1,125 का प्राइस टारगेट रखा है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (जो जून 2026 में समाप्त हुई) के नतीजे पेश किए हैं।
डिस्बर्समेंट में गिरावट की वजह?
निवेशकों के लिए एक अहम बात यह है कि इस तिमाही में लोन डिस्बर्समेंट में 28% की साल-दर-साल गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म ने स्पष्ट किया कि यह गिरावट मुख्य रूप से अकाउंटिंग पॉलिसी में हुए आंतरिक बदलाव के कारण है। कंपनी ने चेक हैंडओवर के समय डिस्बर्समेंट दर्ज करने की बजाय, चेक के कैश होने पर ही इसे दर्ज करने का तरीका अपनाया है। इस टाइमिंग के अंतर के कारण, कुछ प्रोसेस किए गए लोन तिमाही रिपोर्ट में शामिल नहीं हो पाए, जिससे आधिकारिक आंकड़ों में यह गिरावट दिखी।
नतीजों में दिखी मजबूती
इस अकाउंटिंग एडजस्टमेंट के बावजूद, कंपनी की वित्तीय सेहत में सुधार दिखा। ISFC ने प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 20% की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की, जो ₹143 करोड़ रहा। इसके अलावा, जून 2026 के अंत तक कंपनी के ग्रॉस एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM)—यानी कंपनी द्वारा प्रबंधित कुल लोन की वैल्यू—में 24% की ग्रोथ देखी गई और यह ₹11,284 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी को पूरा विश्वास है कि वह पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने लोन बुक में 25-30% की सालाना ग्रोथ हासिल कर लेगी। अकेले जुलाई 2026 में ही ₹4 अरब के डिस्बर्समेंट के साथ यह ग्रोथ मजबूत दिख रही है।
जोखिम और आगे की राह
हालांकि ग्रोथ का आउटलुक मजबूत है, शेयरधारकों को कुछ जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए। अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा है, और मार्केट शेयर के लिए लड़ते हुए इंटरेस्ट मार्जिन को स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा, एसेट क्वालिटी में मामूली बदलाव आया है, जिसमें ग्रॉस स्टेज 3 एसेट्स (ओवरड्यू लोन का एक पैमाना) पिछले साल की समान अवधि के 1.2% की तुलना में हालिया तिमाही में बढ़कर 1.5% हो गया है। मैनेजमेंट का कहना है कि ये आंकड़े उनकी उम्मीदों के दायरे में हैं और मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण सामान्य हैं, लेकिन इनमें कोई भी बड़ी वृद्धि प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकती है।
निवेशकों को कंपनी की लोन कलेक्शन प्रक्रियाओं पर भी नजर रखनी चाहिए। आक्रामक ग्रोथ के लक्ष्यों के साथ, खराब लोन की वृद्धि को रोकने के लिए सख्त अंडरराइटिंग मानकों को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE), जो तिमाही के लिए लगभग 17.5% था, एक और महत्वपूर्ण मेट्रिक होगा जिस पर नजर रखी जानी चाहिए, क्योंकि यह दर्शाता है कि कंपनी शेयरधारकों की पूंजी का उपयोग करके कितनी कुशलता से मुनाफा कमा रही है।
