स्थिरता का दम: ICICI Bank पर Kotak का भरोसा
Kotak Securities के विश्लेषकों ने ICICI Bank की मार्जिन को बचाने की रणनीति की तारीफ की है। फर्म के मुताबिक, बैंक आक्रामक ग्रोथ के बजाय डिसिप्लिन्ड तरीके से मार्जिन को सुरक्षित रख रहा है, जिससे यह मुश्किल समय में भी मजबूती बनाए रखेगा। बैंक का लायबिलिटी(Liability) फ्रेंचाइजी काफी मजबूत है, जिसके तहत 40% डिपॉजिट CASA से आते हैं। इससे बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) स्थिर रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि ICICI Bank का रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) 2.1% से 2.3% और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) 14% से 16% के बीच रह सकता है। एसेट क्वालिटी (Asset Quality) भी शानदार बनी हुई है, जहां ग्रॉस एनपीए (Gross NPAs) 1.5% से 1.6% और नेट एनपीए (Net NPAs) सिर्फ 0.4% पर हैं। प्रोविजन कवरेज रेशियो (Provision Coverage Ratio) 76% है। भले ही Q3FY26 के नतीजों में एकमुश्त प्रोविजनिंग के कारण थोड़ी गिरावट दिखी हो, लेकिन कोर ऑपरेशनल परफॉरमेंस मजबूत है। बैंक की CET-1 कैपिटल 16.5% पर है, जो भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए अनुमानित 9.7% से 10.3% की क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) के मुकाबले इसे तैयार रखती है। ICICI Bank का P/E रेशियो लगभग 18.2 से 20.04 है, जो कुछ पीएसयू (PSU) बैंकों और मेटल कंपनियों (जैसे Hindalco का 12.90, NMDC का 10.35) से ज्यादा है, पर बैंक की मजबूत पोजीशन को दर्शाता है। इसका P/B रेशियो करीब 2.84 है।
कमोडिटी साइकिल और रीस्ट्रक्चरिंग: Vedanta Limited
Vedanta Limited की बात करें तो Kotak Securities को इसके वैल्यू अनलॉक होने की उम्मीद है, खासकर कंपनी की 5 अलग-अलग एंटिटीज (Entities) में डी-मर्जर (Demerger) की योजना से, जो Q1FY27 तक पूरी होने की उम्मीद है। कंपनी अपनी कैपेसिटी एक्सपेंशन (Capacity Expansion) पर भी तेजी से काम कर रही है।
Q3FY26 में, एल्युमीनियम (Aluminum) और जिंक (Zinc) सेगमेंट के शानदार प्रदर्शन के दम पर Vedanta का कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA (Adjusted EBITDA) ₹146 बिलियन रहा, जो उम्मीदों से बेहतर था। एल्युमीनियम, जो कमाई का 50% हिस्सा है, की EBITDA में सालाना 54% की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई। कंपनी का 85% EBITDA FY2027E तक एल्युमीनियम, जिंक और सिल्वर (Silver) जैसे मेटल्स से आने का अनुमान है। Vedanta ने बड़ी एल्युमीनियम और एल्युमिना (Alumina) कैपेसिटी शुरू की है और आगे भी विस्तार की योजना है।
हालांकि, कमोडिटी की कीमतों का भविष्य मिला-जुला है। Goldman Sachs के अनुसार, एल्युमीनियम बाजार में सरप्लस (Surplus) की उम्मीद है और कीमत Q4 2026 तक $2,350/टन तक गिर सकती है। जिंक की कीमतों पर भी 2026-27 में दबाव दिख सकता है, पर शुरुआती इन्वेंट्री (Inventories) कम होने से अभी तेजी बनी हुई है। सिल्वर का आउटलुक बुलिश (Bullish) है, जिसकी कीमत 2026 में $56 से $81 प्रति औंस रहने का अनुमान है। Vedanta का P/E रेशियो लगभग 25.7 के आसपास है। होल्डिंग कंपनी Vedanta Resources ने भी कर्ज कम करने के लिए कदम उठाए हैं।
जोखिम और आगे की राह
ICICI Bank के लिए मुख्य चिंता भारतीय बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ का धीमा होना है, जो NIMs पर दबाव डाल सकता है। वहीं, Vedanta के लिए कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव एक बड़ा जोखिम है। एल्युमीनियम सरप्लस से रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी प्रभावित हो सकती है। कंपनी के होल्डिंग लेवल पर भारी कर्ज भी एक संरचनात्मक जोखिम (Structural Risk) बना हुआ है। विश्लेषकों ने Vedanta के लिए ₹510 से ₹930 तक के टारगेट प्राइस दिए हैं, जो अलग-अलग अनुमानों को दर्शाते हैं।
आगे चलकर, ICICI Bank के लिए अपनी मजबूत लायबिलिटी प्रोफाइल और डिसिप्लिन्ड अंडरराइटिंग (Disciplined Underwriting) को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। Vedanta के लिए, डी-मर्जर की योजना का सफल कार्यान्वयन और ऑपरेश्नल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) शेयरहोल्डर वैल्यू (Shareholder Value) अनलॉक करने के लिए अहम साबित होगी।