Hindustan Unilever ने अपनी नई 'Winning in New India' स्ट्रैटेजी पेश की है। कंपनी कैपिटल स्पेंडिंग को बढ़ाकर टर्नओवर का **3%** करेगी और मार्जिन गाइडेंस को **22-24%** के दायरे में सेट किया है। हालांकि, शेयर में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
बड़े बदलाव की तैयारी
Hindustan Unilever (HUL) ने हाल ही में अपने कैपिटल मार्केट्स डे के दौरान 'Winning in New India' नाम से एक बड़े रणनीतिक बदलाव की घोषणा की है। कंपनी अब अपने पुराने ढर्रे को छोड़कर टारगेटेड और सेगमेंट-आधारित ग्रोथ मॉडल पर फोकस करेगी। HUL का मुख्य ध्यान मेल ग्रूमिंग और प्रीमियम स्किनकेयर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में वॉल्यूम ग्रोथ पर है।
कैपेक्स और मार्जिन गाइडेंस
ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए कंपनी ने अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को अगले पांच साल के लिए टर्नओवर के 2% से बढ़ाकर 3% करने का फैसला किया है। इसके अलावा, कंपनी ने अपने मीडियम-टर्म EBITDA मार्जिन गाइडेंस को 22-24% की रेंज में रखा है, जो पहले 22.5-23.5% थी। यह बदलाव कंपनी को बिजनेस में दोबारा निवेश (reinvest) करने की अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देगा।
बाजार की सुस्ती और ब्रोकरेज की राय
वित्तीय वर्ष 2026 में HUL का स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹63,763 करोड़ रहा और EBITDA मार्जिन 23.6% दर्ज किया गया। हालांकि, इन बड़े फैसलों के बावजूद शेयर बाजार में सुस्ती है। साल-दर-साल (YTD) आधार पर शेयर 15% टूट चुका है। सोमवार को भी स्टॉक 0.55% गिरकर ₹1,962.5 के आसपास ट्रेड कर रहा था।
ब्रोकरेज हाउस इस स्टॉक पर बंटे हुए हैं। Jefferies, Nomura, और Nuvama जैसे फर्म्स ने इसे 'Buy' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹2,820 तक रखा है। वहीं, CLSA जैसे विश्लेषकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए ₹1,804 का टारगेट दिया है, जिनका मानना है कि मौजूदा कॉम्पिटिटिव माहौल में एक्जीक्यूशन बड़ी चुनौती होगी।
निवेशकों के लिए जोखिम
आने वाले समय में पाम ऑयल और क्रूड डेरिवेटिव्स जैसे कमोडिटी के बढ़ते दाम मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं। साथ ही, क्विक-कॉमर्स चैनलों में बढ़ती एक्विजिशन कॉस्ट और ग्रामीण मांग में सुस्ती भी HUL के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
