Helios Capital के CEO Dinshaw Irani का मानना है कि भारतीय बाजार में Mid-Cap और Small-Cap कंपनियों में बड़े स्टॉक्स के मुकाबले ज्यादा ग्रोथ की क्षमता है। उन्होंने प्राइवेट सेक्टर के कैपिटल स्पेंडिंग पर जोर दिया है, साथ ही IT सेक्टर के लिए AI से होने वाले जोखिमों को लेकर आगाह किया है।
निवेश की नई रणनीति: 'एलिमिनेशन इन्वेस्टिंग'
Helios Capital अपनी निवेश रणनीति में 'एलिमिनेशन इन्वेस्टिंग' (Elimination Investing) का इस्तेमाल करती है। इसका मतलब है कि उन कंपनियों को पोर्टफोलियो से बाहर कर देना जो अकाउंटिंग, गवर्नेंस और इंडस्ट्री स्ट्रक्चर के कड़े मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। यह तरीका ऐसी कंपनियों को दूर रखता है जो केवल अस्थायी मार्केट मोमेंटम पर चलती हैं, जिससे पोर्टफोलियो में केवल हाई-क्वालिटी और हाई-ग्रोथ बिजनेस ही बचते हैं।
प्राइवेट सेक्टर का केपेक्स (Capex) है ग्रोथ का इंजन
इरानी के मुताबिक, भारत की आर्थिक सेहत के लिए प्राइवेट सेक्टर का कैपिटल एक्सपेंडिचर सबसे बड़ा इंजन है। सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च भले ही एक बेसलाइन तैयार करता है, लेकिन असली 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' प्राइवेट औद्योगिक विस्तार से आता है। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कौन सी कंपनियां अपनी कैपेसिटी बढ़ाने की योजनाओं को प्रभावी ढंग से पूरा कर रही हैं।
IT सेक्टर पर मंडरा रहा है खतरा
इरानी ने पारंपरिक IT सर्विसेज सेक्टर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) पुराने बिजनेस मॉडल्स के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। जो कंपनियां पुराने लेबर-आर्बिट्रेज मॉडल पर टिकी हैं, उन पर ऑपरेशनल दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों को ऐसी IT कंपनियों के प्रति सावधान रहना चाहिए जो AI-इंटीग्रेटेड मॉडल में बदलाव करने में सुस्त हैं।
FDI और टैक्स रिफॉर्म्स
विदेशी निवेश को भारत की ओर और आकर्षित करने के लिए इरानी ने टैक्स सुधारों का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि अगर नई विदेशी पूंजी के आने पर कैपिटल गेन्स टैक्स में कुछ समय के लिए छूट (Moratorium) दी जाए, तो भारत ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल फंड्स के लिए और भी ज्यादा कॉम्पिटिटिव बन सकता है।
