रेवेन्यू में उछाल, पर मार्जिन पर लगा ग्रहण!
Hindustan Unilever (HUL) का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू Q4 FY26 में 8% बढ़कर आया है, जो पिछले तीन सालों से भी ज़्यादा की सबसे बड़ी ग्रोथ है। कंपनी के वॉल्यूम में 6% की वृद्धि देखी गई, खासकर रूरल डिमांड में सुधार के संकेत मिले हैं। लेकिन, इस टॉप-लाइन परफॉर्मेंस के बावजूद, कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन में भारी गिरावट आई है और यह 23.5% पर आ गए हैं।
रॉ मटेरियल कॉस्ट का बढ़ा बोझ
इस मार्जिन दबाव की मुख्य वजह 8-10% तक बढ़ी रॉ मटेरियल कॉस्ट है, खासकर एडिबल ऑयल और क्रूड-लिंक्ड पैकेजिंग जैसी चीजों के दाम बढ़ने से। HUL ने लागत को कंट्रोल करने के लिए कीमतों में इजाफा करने की कोशिश की, लेकिन वह पूरी तरह से बढ़ी हुई लागत को वसूल नहीं कर पाई, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ा।
वैल्यूएशन और पीयर कंपेरिजन
विश्लेषकों का मानना है कि HUL अभी भी अपने वैल्यूएशन को लेकर महंगी बनी हुई है। Systematix के अनुमानों के मुताबिक, HUL का वैल्यूएशन FY27 अनुमानित कमाई पर लगभग 47 गुना और FY28 अनुमानित कमाई पर 43 गुना है, जबकि EV/EBITDA मल्टीपल 30x के करीब है। इसकी तुलना में, प्रतिद्वंद्वी ITC का P/E 11-17x है, और Nestle India 80x पर ट्रेड कर रहा है। पिछले एक साल में Nifty FMCG इंडेक्स 9.21% गिरा है, जबकि HUL के शेयर में सिर्फ 3.14% की बढ़ोतरी हुई है। स्टॉक अपने हाल के उच्चतम स्तरों से गिरकर ₹2,040-₹2,100 के आसपास ट्रेड कर रहा है।
आगे की राह और एनालिस्ट्स की राय
HUL के लिए सबसे बड़ा चैलेंज लगातार बढ़ती रॉ मटेरियल इन्फ्लेशन को मैनेज करना और रेवेन्यू ग्रोथ को प्रॉफिट में बदलना है। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। Systematix ने 'होल्ड' रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस घटाकर ₹2,515 कर दिया है। वहीं, ICICI Securities, Motilal Oswal और Axis Direct जैसी फर्मों ने 'बाय' या 'होल्ड' रेटिंग दी है, जिनके टारगेट ₹2,510 से ₹2,800 के बीच हैं, जो 5-15% तक की सीमित अपसाइड दिखा रहे हैं। एनालिस्ट्स का औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹2,600 है।
