ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस HSBC ने भारतीय इक्विटी मार्केट पर अपना रुख बदल दिया है। अब उन्होंने 'अंडरवेट' (Underweight) रेटिंग से इसे 'न्यूट्रल' (Neutral) कर दिया है, साथ ही 2026 के अंत तक BSE Sensex के लिए **84,000** का लक्ष्य रखा है। यह बदलाव कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और फॉरेन कैपिटल की वापसी के कारण आया है।
भारतीय बाजार पर HSBC का बदलता नज़रिया
दुनियाभर में अपनी सेवाएं देने वाली फाइनेंशियल फर्म HSBC ने भारतीय शेयर बाजार पर अपनी राय को 'अंडरवेट' से 'न्यूट्रल' कर दिया है। दरअसल, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी कई भारतीय कंपनियों के लिए राहत लेकर आई है, क्योंकि ये कंपनियां तेल आयात पर बहुत निर्भर करती हैं। तेल सस्ता होने से इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव कम होता है और नतीजतन, अर्निंग्स फोरकास्ट में बड़ी गिरावट का जोखिम भी कम हो जाता है। इससे शेयर की वैल्यूएशन के लिए एक स्थिर माहौल बनता है।
Sensex पर क्या है लक्ष्य?
इस अपग्रेड के साथ, HSBC ने BSE Sensex के लिए साल के अंत 2026 तक का लक्ष्य 84,000 कर दिया है, जो कि पहले के 80,500 के अनुमान से ज़्यादा है। मौजूदा ट्रेडिंग के हिसाब से, यह लक्ष्य लगभग 8.6% की संभावित ग्रोथ दिखाता है। यह बढ़ोतरी अप्रैल 2026 के मुकाबले ज़्यादा सकारात्मक नज़रिया दिखाता है, जब ब्रोकरेज ने एनर्जी की बढ़ती कीमतों और नॉर्थ ईस्ट एशियन मार्केट्स में ज़्यादा आकर्षक मौकों के कारण भारत की रेटिंग घटा दी थी।
बावजूद इसके, इस साल भारतीय बाजार को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। साल-दर-तारीख (Year-to-date) 7.7% की गिरावट दर्ज की गई है, जो कि एशिया-पैसिफिक के व्यापक इक्विटी रीजन से पिछड़ गई है।
फॉरेन इन्वेस्टर्स की वापसी
भारी बिकवाली के दौर के बाद, निवेशकों की रुचि पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि जुलाई के महीने में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने बाजार में करीब $1.6 बिलियन का निवेश किया है। यह इस साल की शुरुआत के ठीक विपरीत है, जब कुल $27.7 बिलियन का फॉरेन आउटफ्लो देखा गया था।
हालांकि, यह नई खरीदारी बाजार की लिक्विडिटी के लिए एक सकारात्मक संकेत है, HSBC का कहना है कि इन फ्लो की लंबी अवधि की स्थिरता की गारंटी नहीं है। एक जोखिम यह भी है कि ग्लोबल कैपिटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े निवेशों की ओर बढ़ रहा है, जो भारत के लिए उपलब्ध फॉरेन इन्वेस्टमेंट फंड्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
सेक्टर और जोखिम
HSBC ने कुछ चुनिंदा सेक्टर्स पर भी भरोसा जताया है। उन्होंने प्राइवेट बैंक्स, रियल एस्टेट, कमोडिटीज़, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी गुड्स और कुछ चुनिंदा इंडस्ट्रियल कंपनियों को प्राथमिकता दी है। ये सेक्टर अक्सर घरेलू आर्थिक स्वास्थ्य और स्थिर एनर्जी कॉस्ट से फायदा उठाते हैं।
निवेशकों को इस पर नज़र रखनी होगी कि क्या फॉरेन इनफ्लो का यह सिलसिला जारी रहता है और यह बाजार को साल-दर-तारीख की गिरावट से उबरने में मदद करता है। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भारतीय कंपनियां दूसरी छमाही में कैसे अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखती हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
