HSBC ने भारतीय शेयरों पर अपनी रेटिंग 'Underweight' से बढ़ाकर 'Neutral' कर दी है, और BSE Sensex के लिए साल के अंत तक **84,000** का लक्ष्य तय किया है। यह बदलाव ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में **33%** की गिरावट और भारतीय बाजारों में विदेशी पूंजी की हालिया वापसी के बाद आया है।
भारतीय शेयर बाजार पर HSBC का नया नज़रिया
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म HSBC ने 16 जुलाई 2026 से भारतीय इक्विटी के लिए अपनी रेटिंग को 'Underweight' से अपग्रेड करके 'Neutral' कर दिया है। इस बड़े फैसले के पीछे कमोडिटी की कीमतों में आई नरमी, खासकर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 33% की भारी गिरावट है। अप्रैल में ब्रेंट क्रूड $126.41 के शिखर पर था, लेकिन अब यह काफी नीचे आ गया है। अमेरिकी और ईरान के बीच हुए एक समझौते ने भी इसमें मदद की है, जिससे भारतीय कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा दबाव कम हुआ है।
बाजार का आउटलुक और Sensex का नया लक्ष्य
इस रेटिंग बदलाव के बाद, HSBC ने BSE Sensex के लिए साल के अंत तक 84,000 का लक्ष्य रखा है। इसका मतलब है कि मौजूदा स्तरों से बाजार में लगभग 8.6% की और बढ़ोतरी की संभावना है। ब्रोकरेज का मानना है कि तेल की कीमतों के स्थिर होने से कंपनियों के नतीजों में गिरावट का जोखिम काफी कम हो गया है। गोल्डमैन सैक्स जैसी अन्य फर्मों ने भी भारत के पक्ष में बदलते रुझान पर ध्यान दिया है, जिसमें रुपये की स्थिरता और कमोडिटी की लागत में कमी शामिल है।
विदेशी निवेशकों की वापसी और चिंताएं
बाजार में आए इन सकारात्मक बदलावों के चलते, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने जुलाई में भारतीय शेयरों में $1.6 बिलियन की खरीदारी की है। यह चार महीने के लगातार बिकवाली के बाद एक महत्वपूर्ण उलटफेर है। हालांकि, साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से कुल $27.7 बिलियन निकाले हैं, जो पिछले साल के रिकॉर्ड $18.9 बिलियन के आउटफ्लो से भी ज्यादा है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ग्लोबल निवेशकों ने अपना पैसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े स्टॉक्स की ओर लगाया, जिसमें भारत की हिस्सेदारी उत्तर पूर्वी एशियाई बाजारों की तुलना में कम है।
सेक्टरों पर फोकस और आगे की राह
HSBC ने भारतीय बाजार में प्राइवेट बैंक्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी स्टॉक्स, रियल एस्टेट, कमोडिटीज और चुनिंदा इंडस्ट्रियल्स जैसे सेक्टर्स पर अपना फोकस बढ़ाया है। इन सेक्टर्स को मौजूदा मैक्रो इकोनॉमिक दबावों में कमी का फायदा मिलने की उम्मीद है।
इसके बावजूद, बाजार के सामने कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। साल 2026 में अब तक, भारतीय इक्विटी में 7.7% की गिरावट आई है, जबकि MSCI एशिया-पैसेफिक इंडेक्स (जापान को छोड़कर) में 21% का उछाल देखा गया है। HSBC ने यह भी चेतावनी दी है कि विदेशी पूंजी के प्रवाह की लंबी अवधि की स्थिरता एक बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है। जब तक भारत लगातार आर्थिक स्थिरता बनाए नहीं रखता, तब तक विदेशी निवेशकों की रुचि बनाए रखना मुश्किल होगा। इसलिए, निवेशकों को विदेशी निवेश के आंकड़ों और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये कारक बाजार की मौजूदा रिकवरी की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
