HSBC की रिपोर्ट का खुलासा
HSBC की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय डिलीवरी कंपनियों Zomato और Swiggy के लिए आगे चुनौतियां बढ़ सकती हैं। फर्म ने Zomato की क्विक कॉमर्स सर्विस Blinkit का जिक्र करते हुए कहा है कि यह अभी भी प्रतिद्वंद्वियों से 6-8% महंगी है, जिससे ग्राहकों के खोने का खतरा है। HSBC ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी लंबी अवधि की चिंताओं और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को इन स्टॉक्स के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बताया है।
इन चिंताओं के बावजूद, HSBC ने Zomato पर 'Buy' रेटिंग बनाए रखी है, लेकिन इसका प्राइस टारगेट ₹350 से घटाकर ₹300 कर दिया है। Swiggy के लिए 'Hold' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस को ₹380 से घटाकर ₹300 किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, Zomato के शेयर ₹238.05 पर ट्रेड कर रहे थे और 25 मार्च को 4.89% बढ़े थे, जबकि Swiggy ₹276.95 पर 1.61% चढ़कर बंद हुआ था। दोनों स्टॉक्स हाल की ऊंचाइयों से नीचे कारोबार कर रहे हैं, और Swiggy का शेयर भाव उसके इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) मूल्य से काफी कम है।
वैल्यूएशन पर सवालिया निशान
Zomato का मार्केट कैप 23 मार्च 2026 तक लगभग ₹2,19,015 करोड़ था। हालांकि, इसका वैल्यूएशन, खासकर प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो, काफी अधिक दिखाई देता है। P/E रेशियो मई 2025 तक पिछले बारह महीनों के 293 से लेकर 24 मार्च 2026 तक 994 से अधिक रहा है। ये उच्च आंकड़े बताते हैं कि निवेशक भविष्य में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मुनाफे पर दबाव के कारण ऐसे वैल्यूएशन पर अब अधिक सवाल उठाए जा रहे हैं। Swiggy, जो अभी प्राइवेट है, उसका वैल्यूएशन भी 13 मार्च 2026 तक लगभग $7.87 बिलियन आंका गया था, और FY25 के लिए उसका रेवेन्यू ₹15,600 करोड़ था।
प्रॉफिट बढ़ाने के लिए फीस में बढ़ोतरी, पर जोखिम बरकरार
बढ़ती लागतों और प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए, दोनों कंपनियां प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा रही हैं। Swiggy ने हाल ही में प्रति ऑर्डर अपनी फीस ₹17.58 कर दी है, और Zomato ने अपनी फीस 19.2% बढ़ाकर ₹14.90 (GST से पहले) कर दी है। ये बढ़ोतरी प्रॉफिटेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट के अनुसार, Zomato का प्रति ऑर्डर प्रॉफिट (एडजस्टेड EBITDA) ₹20 से ₹22 के बीच है, इसलिए फीस में लगभग ₹2.5 की वृद्धि काफी मायने रखती है। हालांकि, इन बढ़ी हुई फीस का लगभग 40% डिस्काउंट देने में इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि ग्राहकों को ऑर्डर करने के लिए प्रेरित किया जा सके। यह दिखाता है कि कीमतों को बढ़ाए बिना ग्राहकों को बनाए रखना कितना मुश्किल है। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनियों को मांग को नुकसान पहुंचाए बिना एक संतुलन बनाना होगा।
जबरदस्त प्रतिद्वंद्विता से प्राइस वॉर
क्विक कॉमर्स बाजार बेहद प्रतिस्पर्धी है। Blinkit का मार्केट शेयर अनुमानित 40-50% है, जबकि Zepto और Swiggy Instamart का शेयर लगभग 23-30% है। Zepto ने बड़े फंड के साथ आक्रामक विस्तार किया है। यह प्रतिद्वंद्विता अक्सर प्राइस वॉर और भारी छूट की ओर ले जाती है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ता है। पिछले साल जनवरी में, Jefferies ने Zomato की रेटिंग डाउनग्रेड की थी, जिसमें कहा गया था कि प्रतिस्पर्धा आय ग्रोथ को धीमा कर सकती है, और उसने टारगेट प्राइस भी कम कर दिया था। इन सेक्टर की समस्याओं के कारण Zomato के शेयर अपनी ऊंचाई से काफी नीचे गिरे हैं। कंपनियां अब प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस कर रही हैं, लेकिन अत्यधिक ग्रोथ को प्राथमिकता देने को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ONDC जैसे उभरते प्लेटफॉर्म, जो कम कमीशन की पेशकश करते हैं, वे भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
सावधानी के बावजूद विश्लेषक ज्यादातर बुलिश
HSBC द्वारा टारगेट प्राइस कम करने के बावजूद, अधिकांश विश्लेषक Zomato और Swiggy को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। Zomato को कवर करने वाले 33 विश्लेषकों में से 30 'Buy' की सलाह देते हैं, और Swiggy को कवर करने वाले 28 में से 23 भी इसे 'Buy' रेट करते हैं। उदाहरण के लिए, Elara Capital का अनुमान है कि Zomato का शेयर ₹415 तक जा सकता है, और वे प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी को प्रॉफिट मार्जिन के लिए सकारात्मक मानते हैं। समग्र रूप से, भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर बढ़ रहा है, और AI व क्लाउड एडॉप्शन के समर्थन से 2026 में आईटी खर्च $176 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद है। हालांकि, क्विक कॉमर्स के भीतर तीव्र प्रतिस्पर्धा, क्या ग्राहक लंबी अवधि में उच्च कीमतों को स्वीकार करेंगे, और ग्राहकों को खोए बिना कंपनियों की स्थायी प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की क्षमता भविष्य के प्रदर्शन के लिए प्रमुख कारक हैं।