ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस HSBC ने भारतीय शेयरों पर बुलिश रुख अपनाया है। Nifty 50 के **16x** फॉरवर्ड अर्निंग्स पर आने के बाद, बैंक ने प्राइवेट लेंडर्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर में निवेश के मौके तलाशे हैं, हालांकि IPO की बाढ़ को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
भारतीय बाजार की वैल्यूएशन अब एक आरामदायक स्तर पर आ गई है, जिसे देखते हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स का नजरिया बदल रहा है। HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, Nifty 50 अब 16 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले एक दशक में केवल दो बार ही देखा गया है। मिड-कैप शेयरों का हाल भी ऐसा ही है, जो अब 24 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स पर मिल रहे हैं—यानी अपने 5 साल के औसत से 13% नीचे।
निवेश के लिए पसंदीदा सेक्टर
HSBC का मानना है कि प्राइवेट बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) रिस्क-एडजस्टेड ग्रोथ के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प हैं। फाइनेंशियल सेक्टर पोर्टफोलियो को मजबूती दे सकता है क्योंकि क्रेडिट की मांग और प्राइवेट प्लेयर्स की कार्यक्षमता लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल सेक्टर पर भी कंपनी दांव लगा रही है, जिसमें डिफेंस, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कमोडिटी सेगमेंट में एल्युमीनियम को प्राथमिकता दी गई है।
कमाई और जोखिम का गणित
वैल्यूएशन सुधरने के बावजूद, अर्निंग्स को लेकर अनुमान थोड़ा सतर्क है। HSBC ने FY27 के लिए इंडिया इंक. के प्रॉफिट ग्रोथ का अनुमान 11% से 12% के बीच रखा है, जो मार्केट कंसेंसस से कम है। ऊंची बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई जैसे मैक्रो फैक्टर्स मुनाफे पर दबाव डाल सकते हैं।
इसके अलावा, बाजार में आने वाले नए IPO का सिलसिला 2027 की शुरुआत तक बने रहने की संभावना है। यह लिक्विडिटी को मौजूदा शेयरों से खींच सकता है, जिससे शॉर्ट-टर्म में प्राइस पर दबाव बना रह सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या कंपनियां अपनी अर्निंग्स उम्मीदों पर खरा उतर पाती हैं और क्या फॉरेन इंस्टीट्यूशनल कैपिटल की वापसी मजबूती से हो पाती है।
