HDFC Securities ने Q2 के नतीजों के बाद 8 प्रमुख भारतीय कंपनियों के प्राइस टारगेट और आउटलुक में बदलाव किया है। मार्केट की स्थिति मिली-जुली है; जहां रियल एस्टेट और इंजीनियरिंग सेक्टर में तेजी दिख रही है, वहीं बैंकिंग और रिटेल सेक्टर पर दबाव बरकरार है।
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म HDFC Securities ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। मार्केट में इस वक्त सेक्टर के आधार पर प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।\n\n### कहां दिख रही है मजबूती?\nरियल एस्टेट और इंजीनियरिंग सर्विसेज सेक्टर में आउटलुक पॉजिटिव है। Sobha और Oberoi Realty को हाउसिंग मार्केट में बनी मजबूत मांग का फायदा मिल रहा है। वहीं, निर्माण गतिविधियों में तेजी के चलते UltraTech Cement पर भी ब्रोकरेज की नजर बनी हुई है। इन कंपनियों का प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन इसे प्रतिस्पर्धियों से आगे रख रहा है।\n\n### बैंकिंग और रिटेल पर क्यों है सावधानी?\nरिपोर्ट में बैंकिंग सेक्टर के लिए डिपॉजिट मोबिलाइजेशन (Deposit Mobilization) को सबसे बड़ी चुनौती बताया गया है। लेंडर्स के लिए फंड की लागत (Cost of funds) और लिक्विडिटी मैनेज करना मुश्किल हो रहा है, जिसका सीधा असर Union Bank of India जैसे बैंकों की ग्रोथ पर पड़ रहा है।\n\nदूसरी ओर, रिटेल सेक्टर में रिकवरी उम्मीद से धीमी है। डिस्क्रिशनरी स्पेंडिंग (Discretionary spending) कम होने से Shoppers Stop जैसी कंपनियों के बिजनेस पर असर पड़ा है। वहीं, Bajaj Finance और Piramal Finance जैसे बड़े नॉन-बैंकिंग लेंडर्स के लिए चुनौती क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी को बैलेंस करने की है।\n\nइसके अलावा, टेक्नोलॉजी सेक्टर में L&T Technology Services के टारगेट में भी बदलाव किया गया है, जिसका पूरा दारोमदार ग्लोबल डिमांड पर टिका है।\n\nइन्वेस्टर्स के लिए सलाह:\nमौजूदा बाजार में सेक्टर का चयन करना सबसे जरूरी है। रियल एस्टेट और इंजीनियरिंग में तो दम दिख रहा है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर में डिपॉजिट बढ़ने तक सावधानी बरतनी चाहिए। रिटेल सेक्टर के लिए कंज्यूमर डिमांड में सुधार का इंतजार करना होगा।
