HDFC Securities की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के कारण Q2 FY27 में कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। ब्रोकरेज का मानना है कि अर्निंग ग्रोथ घटकर **13-14%** रह सकती है, लेकिन डोमेस्टिक केपेक्स (Capex) के दम पर मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में तेजी बनी रहेगी।
HDFC Securities के अनुमान के अनुसार, चालू फाइनेंशियल ईयर के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ धीमी होकर 13-14% पर आ सकती है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछली तिमाही में यह ग्रोथ 18-19% थी। ब्रोकरेज ने साफ किया है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें कंपनियों के मुनाफे यानी बॉटम लाइन पर सीधा असर डाल रही हैं।
मार्जिन पर बढ़ता दबाव
केमिकल, FMCG और सीमेंट जैसे सेक्टर पर इसका सबसे ज्यादा असर दिखने की उम्मीद है। अभी तक ये कंपनियां कम लागत वाले कच्चे माल के स्टॉक का लाभ उठा रही थीं, लेकिन अब यह फायदा धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। ऐसे में निवेशक यह देख रहे हैं कि कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल पाएंगी या नहीं।
मैन्युफैक्चरिंग और केपेक्स का दम
मुनाफे पर दबाव के बावजूद, HDFC Securities भारत के मैन्युफैक्चरिंग और केपेक्स थीम को लेकर काफी पॉजिटिव है। प्राइवेट सेक्टर में खर्च लगातार जारी है और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन करीब 75% के स्तर पर बना हुआ है। इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियां, विशेषकर जो ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और AI डेटा सेंटर से जुड़ी हैं, उन्हें बड़ा फायदा मिल सकता है।
ब्याज दरें और रेगुलेटरी बदलाव
बाजार की नजर अब मॉनेटरी पॉलिसी पर है। HDFC Securities का अनुमान है कि दिसंबर तक US फेडरल रिजर्व 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है, जबकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है। वहीं, बीमा सेक्टर में IRDAI के नए नियमों से डिजिटल डिस्ट्रीब्यूटर्स पर असर पड़ सकता है, जबकि LIC और SBI Life जैसे दिग्गज इस बदलाव को संभालने में अधिक सक्षम दिख रहे हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
आने वाले हफ्तों में मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखना सबसे जरूरी होगा। कंपनियां किस तरह लागत को मैनेज कर रही हैं और दूसरी छमाही (Second Half) में डिमांड को कैसे बरकरार रखेंगी, यह भविष्य की चाल तय करेगा।
