Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures का मुनाफा सितंबर तिमाही में **₹725 करोड़** पर स्थिर रहा है। ब्रोकरेज इनकम में **6.6%** की गिरावट और इक्विटी डेरिवेटिव्स से कमाई घटने का सीधा असर कंपनी के प्रदर्शन पर पड़ा है।
मुनाफे में सुस्ती की वजह
सितंबर 2026 तिमाही के दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹725 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले लगभग स्थिर है। गौर करने वाली बात यह है कि कंपनी ने अपने मार्केटिंग खर्चों को 29% घटाकर ₹105 करोड़ कर दिया था, इसके बावजूद बॉटम-लाइन में कोई खास उछाल नहीं दिखा। इस तिमाही में 5 अतिरिक्त ट्रेडिंग दिन होने के बावजूद वॉल्यूम और मुनाफे में सुस्ती आना बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
डेरिवेटिव्स का दबाव
कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती इक्विटी डेरिवेटिव्स (Equity Derivatives) पर अत्यधिक निर्भरता है। ब्रोकरेज रेवेन्यू ₹1,054 करोड़ रहा, जिसमें 6.6% की गिरावट दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण डेरिवेटिव्स इनकम में 14% की बड़ी गिरावट है। चूंकि कंपनी की कुल ब्रोकरेज कमाई का 65% से ज्यादा हिस्सा डेरिवेटिव्स से आता है, इसलिए इस सेगमेंट में अस्थिरता का सीधा असर कंपनी की कमाई पर पड़ रहा है। साथ ही, कुल ऑर्डर वॉल्यूम भी 7.7% गिरकर 51.73 करोड़ पर आ गया है, जो रिटेल ट्रेडिंग के कम होते उत्साह को दर्शाता है।
वैल्यूएशन पर उठे सवाल
Groww का करंट मार्केट वैल्यूएशन FY27 के अनुमानों के आधार पर 40 के P/E मल्टीपल पर है। जानकारों का कहना है कि यह वैल्यूएशन 'नेशनल स्टॉक एक्सचेंज' (NSE) या 'बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज' (BSE) जैसे संस्थानों से तुलना करने पर काफी महंगा लग सकता है, जिनके पास मजबूत मार्केट एडवांटेज है। इसके मुकाबले, Angel One जैसे डायरेक्ट पियर का P/E मल्टीपल महज 21 है। ऐसे में Groww के लिए इस प्रीमियम वैल्यूएशन को जस्टिफाई करना मुश्किल हो सकता है।
आगे की चुनौतियां
रेगुलेटरी बदलाव भी एक बड़ा रिस्क बने हुए हैं। अगर UPI ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट जैसे नए शुल्क लागू होते हैं, तो ब्रोकरों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर और दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि कंपनी कैसे अपने रेवेन्यू को डेरिवेटिव्स के अलावा अन्य क्षेत्रों में डाइवर्सिफाई करती है और गिरते ट्रेडिंग वॉल्यूम को कैसे संभालती है।
