इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Groww ने अपने सभी यूजर्स के लिए US स्टॉक ट्रेडिंग सर्विस शुरू कर दी है। अब आप **10,000** से ज्यादा अमेरिकी स्टॉक्स और ETFs में पैसा लगा सकते हैं, वो भी फ्रैक्शनल शेयरिंग के जरिए मात्र **0.1%** ब्रोकरेज फीस पर।
अब ग्लोबल मार्केट आपकी पहुंच में
इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Groww ने तीन हफ्ते के पायलट प्रोजेक्ट के बाद अपनी US स्टॉक ट्रेडिंग सुविधा को सभी भारतीय यूजर्स के लिए खोल दिया है। इस अपडेट के जरिए अब आप सीधे ऐप से ही 10,000 से ज्यादा अमेरिकी इक्विटी और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में निवेश कर पाएंगे। इसका मुख्य मकसद उन भारतीय निवेशकों को ग्लोबल मार्केट का एक्सेस देना है, जो दिग्गज टेक और सेमीकंडक्टर कंपनियों में दांव लगाना चाहते हैं।
फ्रैक्शनल शेयरिंग का फायदा
इस सर्विस की सबसे खास बात 'फ्रैक्शनल शेयर्स' (Fractional Shares) है। कई बार अमेरिकी मार्केट में एक शेयर की कीमत हजारों डॉलर होती है, जो छोटे रिटेल निवेशकों के बजट से बाहर होती है। अब आप शेयर का एक छोटा हिस्सा भी खरीद सकेंगे। ब्रोकरेज फीस के तौर पर कंपनी प्रति ट्रांजैक्शन 0.1% शुल्क लेगी। हालांकि, निवेशकों को याद रखना चाहिए कि करेंसी कन्वर्जन और अन्य बैंकिंग चार्जेस भी इसमें शामिल होते हैं, जिन्हें निवेश से पहले कैलकुलेट करना जरूरी है।
निवेश से पहले इन बातों पर दें ध्यान
US मार्केट में निवेश आकर्षक जरूर है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं:
- RBI की लिमिट: भारतीय निवासी RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत प्रति फाइनेंशियल ईयर $2,50,000 तक ही विदेशी निवेश के लिए भेज सकते हैं।
- करेंसी रिस्क: चूंकि निवेश US डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल आपके रिटर्न को सीधे प्रभावित करेगी। अगर डॉलर कमजोर होता है, तो आपके निवेश की वैल्यू रुपये में कम हो सकती है।
- टैक्स और रेगुलेशन: विदेशी रेमिटेंस पर TCS लागू होता है और US स्टॉक्स से होने वाले कैपिटल गेन्स पर भारतीय इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक टैक्स देना होगा। निवेशकों को अपने टैक्स एडवाइजर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
