सितंबर 2026 में भारत का एक्टिव ब्रोकरेज क्लाइंट बेस **4.61 करोड़** के पार पहुंच गया है। टेक-फ्रेंडली प्लेटफॉर्म Groww **1.34 करोड़** अकाउंट्स के साथ मार्केट लीडर बना हुआ है, जबकि कई नामी ब्रोकरेज हाउस के ग्राहकों की संख्या में गिरावट देखी गई है।
भारतीय ब्रोकरेज सेक्टर में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशक अब पुराने तरीकों के बजाय टेक-फर्स्ट प्लेटफॉर्म्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कुल एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या 4.61 करोड़ दर्ज की गई, जिसमें Groww ने 29.16% मार्केट शेयर के साथ अपनी बादशाहत कायम रखी है।
Groww की आक्रामक रफ्तार
Groww की ग्रोथ बाकी इंडस्ट्री की तुलना में कहीं ज्यादा तेज है। सिर्फ सितंबर महीने में ही इस प्लेटफॉर्म ने 1,00,961 नए एक्टिव क्लाइंट्स जोड़े हैं, जो पूरी इंडस्ट्री की कुल 1,61,000 की ग्रोथ का लगभग 63% है। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि नए निवेशकों को कंपनी का मोबाइल-फर्स्ट और आसान इंटरफेस काफी पसंद आ रहा है।
बड़े ब्रोकर्स का मिला-जुला हाल
जहां इंडस्ट्री में पॉजिटिव रुझान है, वहीं अलग-अलग ब्रोकर्स के बीच फासला बढ़ रहा है। Angel One ने इस दौरान 36,956 नए क्लाइंट्स जोड़कर अपनी कुल संख्या 67.6 लाख तक पहुंचाई है। दूसरी ओर, SBI Securities ने 22,525 क्लाइंट्स खोए हैं, जिससे उनका बेस 10.2 लाख रह गया। यही नहीं, Upstox ने 10,343 और Zerodha ने 5,313 एक्टिव यूजर्स गंवाए हैं।
इंडस्ट्री के लिए नए खतरे
बाजार का एक ही जगह केंद्रित होना नई चुनौतियां भी ला रहा है। अगर चंद बड़े प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता बढ़ती है, तो टेक्निकल दिक्कतें आने पर बड़ा नुकसान हो सकता है। साथ ही, रेगुलेटर की तरफ से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट पर बढ़ती सख्ती और मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) को लेकर आने वाले नए नियम इन कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखना यह है कि क्या छोटे और पुराने ब्रोकर्स ग्राहकों को वापस लाने के लिए कोई नई रणनीति अपनाते हैं या यह कंसोलिडेशन इसी तरह जारी रहेगा।
