वॉल्यूम बढ़ा, मुनाफा गिरा: लागतों का भारी खेल
Greenpanel Industries के लिए वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी के मीडियम डेंसिटी फाइबरबोर्ड (MDF) सेगमेंट में वॉल्यूम में 27.8% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई, जो कि घरेलू मांग में उछाल के कारण हुई। लेकिन, इस टॉप-लाइन ग्रोथ के बावजूद, बढ़ती लागतों ने बॉटम-लाइन पर भारी चोट पहुंचाई, जिससे नेट प्रॉफिट में 95.3% की बड़ी गिरावट आई।
पूरे वित्तीय वर्ष 2026 के लिए, कंपनी को ₹29.13 करोड़ का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ, जबकि पिछले साल (FY25) में ₹72.11 करोड़ का मुनाफा था। तिमाही आधार पर, नेट प्रॉफिट घटकर सिर्फ ₹1.37 करोड़ रह गया।
इस मुनाफे में गिरावट की मुख्य वजहें केमिकल की कीमतों में 40-45% की बढ़ोतरी और शिपिंग (Freight) लागतों में इजाफा रहीं। कंपनी ने कीमतों में कुछ बढ़ोतरी की, लेकिन बढ़ी हुई लागतों को पूरी तरह से ग्राहकों पर नहीं डाल पाई, जिससे मार्जिन पर भारी दबाव बना रहा। Q4 FY26 में MDF सेगमेंट का EBITDA मार्जिन घटकर 9.2% पर आ गया।
सेक्टर की चाल और Greenpanel की स्थिति
Greenpanel भारत की सबसे बड़ी वुड पैनल मैन्युफैक्चरर है। भारतीय प्लाइवुड बाजार में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है, और MDF जैसे इंजीनियर्ड वुड की मांग भी बढ़ रही है। अनुमान है कि 2030 तक MDF भारतीय फर्नीचर बाजार का 50% तक हिस्सा हासिल कर सकता है। Greenpanel की इस सेगमेंट में 25-27% की मार्केट शेयर है। हालांकि, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और शिपिंग लागतें पूरे सेक्टर के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) घटकर करीब 5.34% TTM रह गया है। तुलनात्मक रूप से, Century Plyboards (मार्केट कैप ₹17,046 करोड़) और Greenlam Industries (मार्केट कैप ₹5,950 करोड़) जैसी कंपनियां Greenpanel (मार्केट कैप ₹2,223-2,485 करोड़) से काफी बड़ी हैं।
एनालिस्ट्स की राय: धीरे-धीरे वापसी की उम्मीद
इन चुनौतियों के बावजूद, एनालिस्ट्स Greenpanel को लेकर सतर्कता के साथ आशावादी हैं। 13 एनालिस्ट्स ने 'BUY' रेटिंग दी है और औसत टारगेट प्राइस ₹292.50 रखा है, जो मौजूदा भाव से 44% से ज्यादा की तेजी का संकेत देता है। Anand Rathi ने 'BUY' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹320 पर बनाए रखा है, जो FY28 की अनुमानित कमाई पर आधारित है। Prabhudas Lilladher ने भी ₹332 के टारगेट के साथ 'BUY' रेटिंग दी है। वे उम्मीद करते हैं कि FY28 से इंडस्ट्री के ऑपरेटिंग रेट्स बढ़ने पर कंपनी की लाभप्रदता (profitability) में सुधार होगा।