Gravita India के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने कंपनी पर एक पॉजिटिव रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 2028 तक दमदार प्रॉफिट ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है। कंपनी अपने पुराने लेड (Lead) बिज़नेस से आगे बढ़कर अब कॉपर (Copper) और रबर (Rubber) की रीसाइक्लिंग में भी उतर रही है।
Gravita India: नए सेगमेंट में बड़ा दांव
रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनी Gravita India अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव कर रही है। Motilal Oswal की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अब सिर्फ लेड (Lead) की रीसाइक्लिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मल्टी-कमोडिटी (Multicommodity) रीसाइक्लिंग प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही है। इस विस्तार में अब कॉपर (Copper) और रबर (Rubber) जैसे सेगमेंट्स भी शामिल हो गए हैं, जहाँ सस्टेनेबल और रीसाइकल्ड मटेरियल की मांग भारत में तेजी से बढ़ रही है।
कॉपर रीसाइक्लिंग में रणनीतिक कदम
इस स्ट्रेटेजी का एक अहम हिस्सा कंपनी का Rashtriya Metal Industries में 99% हिस्सेदारी खरीदना है। इस डील से Gravita India को कॉपर मार्केट में एंट्री मिली है, साथ ही कंपनी अपने ऑपरेशंस को वर्टिकली इंटीग्रेट (Vertically integrate) भी कर रही है। अब कंपनी सिर्फ स्क्रैप (Scrap) यानी कच्चे माल के कारोबार से आगे बढ़कर वैल्यू-एडेड (Value-added) फिनिश्ड प्रोडक्ट्स बनाने पर फोकस कर रही है। इस वैल्यू चेन में आगे बढ़कर, कंपनी अपने ऑपरेशंस से ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश में है।
फाइनेंशल आउटलुक और टारगेट
ब्रोकरेज फर्म ने फाइनेंशियल ईयर 2026 से 2028 के बीच कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में 38% और EBITDA में 36% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) का अनुमान लगाया है। वहीं, इसी अवधि में प्रॉफिट ग्रोथ 27% रहने की उम्मीद है। ये अनुमान कंपनी की नई रीसाइक्लिंग फैसिलिटीज से आने वाले प्रोडक्शन और हालिया एक्विजिशन (Acquisition) के इंटीग्रेशन पर आधारित हैं। फर्म ने INR 2,200 का टारगेट प्राइस दिया है, जो फाइनेंशियल ईयर 2028 के अनुमानित अर्निंग्स पर शेयर (EPS) के 27 गुना वैल्यूएशन पर आधारित है।
जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें
कंपनी की एक्सपेंशन योजनाएं भले ही महत्वाकांक्षी हों, लेकिन निवेशकों को नए मेटल सेगमेंट में उतरने के एक्जीक्यूशन रिस्क (Execution risk) को ध्यान में रखना चाहिए। कॉपर रीसाइक्लिंग जैसे नए बिजनेस को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट करने के लिए लगातार मांग और स्थिर कमोडिटी प्राइसिंग (Commodity pricing) की जरूरत होगी। अगर कंपनी को इन नए ऑपरेशंस को स्केल करने में देरी का सामना करना पड़ता है या रॉ मटेरियल की लागत में बड़ा उतार-चढ़ाव आता है, तो इसका असर प्रॉफिट मार्जिन (Profit margin) पर पड़ सकता है। इसके अलावा, रीसाइक्लिंग बिजनेस रेगुलेटरी बदलावों (Regulatory changes) और एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड्स (Environmental standards) के प्रति संवेदनशील होता है। आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स (Quarterly results) में यह देखना अहम होगा कि कंपनी नए प्रोजेक्ट्स पर किए जा रहे कैपिटल स्पेंडिंग (Capital spending) के साथ-साथ अपने डेट (Debt) को कैसे मैनेज करती है और मार्जिन प्रोफाइल को कैसे बनाए रखती है। शेयरधारकों को नई रीसाइक्लिंग प्लांट्स के यूटिलाइजेशन लेवल (Utilization level) और मैनेजमेंट की कैपिटल एलोकेशन (Capital allocation) की स्ट्रेटेजी पर नजर रखनी चाहिए।
