Gravita India का बड़ा विस्तार: RMIL का अधिग्रहण
Gravita India ने मेटल रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए ₹565 करोड़ में Rashtriya Metals Industries Limited (RMIL) का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। RMIL, जो 1946 से तांबे और तांबे के मिश्र धातुओं का निर्माण कर रही है, का FY25 में टर्नओवर ₹910 करोड़ था। इस कदम से Gravita की कुल तांबा रीसाइक्लिंग क्षमता 334 किलोटन प्रति वर्ष (ktpa) से बढ़कर 340 ktpa हो जाएगी। RMIL की 31,200-TPA की क्षमता का सीधा इंटीग्रेशन Gravita को फायदा पहुंचाएगा। कंपनी का कहना है कि अतिरिक्त 45 ktpa क्षमता इसी तिमाही में चालू होने वाली है, जिसके Q2FY27 तक पूरी तरह से सक्रिय होने की उम्मीद है। RMIL का लगभग 40% बिज़नेस एक्सपोर्ट से आता है, जिससे Gravita को वैश्विक बाज़ार में और भी बड़ा एक्सपोजर मिलेगा। हालांकि, RMIL का FY25 में ₹60 करोड़ का EBITDA मार्जिन (~6.6%) Gravita के Q3 FY26 के 11% से ज़्यादा के मार्जिन की तुलना में थोड़ा कम है, जो इंटीग्रेशन की चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
EV बैटरी रीसाइक्लिंग में बड़ी छलांग
अपने पारंपरिक मेटल रीसाइक्लिंग के विस्तार के साथ-साथ, Gravita ने ₹14 करोड़ के निवेश से मुंद्रा में 6,000-tpa क्षमता वाला लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग प्लांट भी शुरू किया है। यह कदम भारत के तेज़ी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाज़ार को देखते हुए उठाया गया है, जहां 2024 तक 5.6 मिलियन से अधिक EVs सड़कों पर थीं। अनुमान है कि भारतीय EV बैटरी रीसाइक्लिंग बाज़ार 2023 के USD 12.9 मिलियन से बढ़कर 2030 तक USD 463.0 मिलियन तक पहुंच जाएगा, जो 66.8% की सीएजीआर (CAGR) से बढ़ेगा। हालांकि, यह सेक्टर अभी शुरुआती दौर में है और इसमें औपचारिक रीसाइक्लिंग अभी 5% से भी कम है, ऐसे में अनौपचारिक प्रक्रियाओं से पर्यावरण और सुरक्षा को जोखिम है।
वैल्यूएशन पर सवालिया निशान और प्रतिस्पर्धियों से तुलना
Gravita India वर्तमान में अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों जैसे Hindalco Industries और Vedanta Limited की तुलना में काफी ज़्यादा प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, Gravita का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 31.35 से 39.36 गुना है। इसकी तुलना में, Hindalco का P/E लगभग 11-13 गुना और Vedanta का 16-19 गुना है। Gravita का मौजूदा P/E इसके पिछले 10 साल के औसत 23 गुना से भी काफी ऊपर है। कंपनी का ₹2,000 का टारगेट प्राइस, FY28E ईपीएस (EPS) पर 28x मल्टीपल दर्शाता है, जो भविष्य के लिए बहुत उम्मीदें जगाता है, लेकिन यह बाज़ार की वास्तविकताओं से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरकारी नीतियों का सहारा और बाज़ार का बढ़ता दायरा
Gravita को रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों का भी भरपूर फायदा मिल रहा है। बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स (BMWR), एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (EPR) और रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) जैसी पहलों से स्क्रैप की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत का समग्र मेटल रीसाइक्लिंग बाज़ार भी तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके 2033 तक USD 18.87 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) स्टीलमेकिंग की ओर बढ़ता झुकाव भी स्क्रैप की मांग को बढ़ा रहा है।
जोखिम और चुनौतियां
Gravita की इस आक्रामक विस्तार रणनीति में कई बड़े जोखिम भी शामिल हैं। सबसे बड़ी चिंता वैश्विक कमोडिटी कीमतों, खासकर एल्युमीनियम की, में होने वाली अस्थिरता है, जिसका सीधा असर मार्जिन पर पड़ सकता है। EV बैटरी रीसाइक्लिंग सेक्टर, अपनी शुरुआती अवस्था और अनौपचारिक प्रक्रियाओं के कारण, आने वाले समय में मार्जिन पर दबाव बना सकता है। RMIL के अधिग्रहण के साथ इंटीग्रेशन रिस्क और परिचालन दक्षता को एकीकृत करने की चुनौती भी कंपनी के सामने है। हालांकि, विश्लेषकों का झुकाव अभी भी 'बाय' (Buy) रेटिंग के साथ सकारात्मक है, जो कंपनी की लंबी अवधि की विकास क्षमता में विश्वास दिखाता है।