Grasim Industries अपने नए पेंट बिजनेस 'बिरला ओपस' और केमिकल सेगमेंट में बड़ा दांव लगा रही है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal को उम्मीद है कि कंपनी अगले कुछ सालों में जबरदस्त कमाई (Earnings Growth) करेगी। हालांकि, भारी निवेश के चलते कर्ज (Debt) और प्रॉफिट मार्जिन पर नजर रहेगी।
Grasim Industries की नई राह: पेंट और केमिकल पर फोकस
Grasim Industries एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। कंपनी अपने नए बिजनेस वेंचर्स को तेजी से बढ़ा रही है, वहीं अपने पुराने विस्कोज स्टेपल फाइबर (VSF) और केमिकल बिजनेस में भी मजबूती बनाए हुए है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने हाल ही में कंपनी की ग्रोथ की संभावनाओं पर प्रकाश डाला है। फर्म का अनुमान है कि FY26 से FY28 के बीच कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में सालाना 38% की ग्रोथ देखने को मिल सकती है। यह उम्मीद कंपनी के विविध पोर्टफोलियो, खासकर नए बिजनेस लाइन्स के तेजी से विस्तार पर आधारित है।
'बिरला ओपस' पेंट और ई-कॉमर्स का विस्तार
'बिरला ओपस' पेंट बिजनेस कंपनी का एक बड़ा फोकस एरिया बनकर उभरा है। कंपनी ने अपने छह ग्रीनफील्ड प्लांट स्थापित कर लिए हैं और अब भारत की पेंट क्षमता का 24% हिस्सा रखती है। भले ही भारतीय पेंट इंडस्ट्री में हाल में मांग की कुछ चुनौतियां रही हैं, Grasim के पेंट सेगमेंट ने Q3 FY26 में इंडस्ट्री की औसत ग्रोथ से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। कंपनी का लक्ष्य FY28 तक ₹10,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना और इस वेंचर को ब्रेक-ईवन (Breakeven) पर लाना है।
इसी के साथ, कंपनी का B2B ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, 'बिरला पिवट' (Birla Pivot) भी तेजी से रेवेन्यू बढ़ा रहा है, जो FY26 में करीब ₹7,900 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, भारी शुरुआती निवेशों के कारण यह बिजनेस फिलहाल घाटे में है, लेकिन H2 FY27 तक इसके ब्रेक-ईवन पर आने की उम्मीद है।
केमिकल और VSF में कुशलता पर जोर
अपने स्थापित केमिकल सेगमेंट में, Grasim अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए कुशलता (Efficiency) पर जोर दे रही है। एक मुख्य रणनीति FY28 तक अपने क्लोरीन इंटीग्रेशन को 70% तक बढ़ाना है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और कॉस्टिक सोडा प्लांट्स का बेहतर उपयोग होगा। कंपनी FY27 तक 45% रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग करने का लक्ष्य रखकर खुद के अक्षय ऊर्जा स्रोतों में भी निवेश कर रही है, ताकि बिजली की लागत कम हो सके। इसके अलावा, 50 kilotons per annum की नई एपॉक्सी क्लोरोहाइड्रिन यूनिट से महंगे आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है, जिससे स्पेशियलिटी केमिकल्स डिवीजन की लागत स्थिर रहेगी।
वहीं, VSF बिजनेस में कंपनी FY30 तक अपनी लियोसेल (Lyocell) क्षमता को 210 kilotons per annum तक बढ़ाने की योजना बना रही है। इस विस्तार का उद्देश्य कंपनी की बाजार स्थिति को मजबूत करना है, जिसके लिए कंपनी कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने के लिए पल्प (Pulp) और कॉस्टिक सोडा की अपनी आंतरिक आपूर्ति का उपयोग करेगी।
वित्तीय स्थिति और निवेशकों के लिए मुख्य बातें
कंपनी की आक्रामक निवेश रणनीति में भारी कैपिटल स्पेंडिंग शामिल है, जिससे FY27 में नेट डेट (Net Debt) के चरम पर पहुंचने की उम्मीद है। निवेशक मौजूदा सेगमेंट्स, जैसे VSF और केमिकल्स से उत्पन्न होने वाले कैश फ्लो की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे, ताकि इन नए वेंचर्स को फंड किया जा सके। FY27 में नेट प्रॉफिट (Net Profit) में बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिसमें सहायक कंपनी UltraTech Cement से मिलने वाले डिविडेंड (Dividend) का भी योगदान रहेगा। आने वाली तिमाहियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि 'बिरला ओपस' और 'बिरला पिवट' अपने लाभ लक्ष्यों को कितनी तेजी से हासिल करते हैं, साथ ही इन विस्तार परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाले कुल कर्ज के दबाव का प्रबंधन कैसे करते हैं।
