Gokaldas Exports ने Q1 FY27 में शानदार प्रदर्शन करते हुए **₹1,180 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है। भारत और अफ्रीका के बाजारों में मिली कामयाबी के बावजूद, बढ़ते खर्चों और प्रमोटर प्लेज जैसे रिस्क पर बाजार की नजरें टिकी हैं।
Gokaldas Exports का नया फाइनेंशियल ईयर (FY27) एक बड़े टर्नअराउंड साइकिल की ओर बढ़ रहा है। कंपनी ने पहली तिमाही में शानदार रफ्तार दिखाते हुए ₹1,180 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू हासिल किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 21% ज्यादा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट भी 6.75% बढ़कर ₹44.3 करोड़ पर पहुंच गया है।
क्या है कंपनी की रणनीति?
कंपनी ने अपने कारोबार को दो हिस्सों में बांटकर इसे मजबूत किया है। भारतीय ऑपरेशंस में कंपनी हाई-वैल्यू अपैरल पर ध्यान दे रही है, जबकि अफ्रीका डिवीजन एक 'वॉल्यूम इंजन' की तरह काम कर रहा है। 'अफ्रीकन ग्रोथ एंड ऑपर्च्युनिटी एक्ट' (AGOA) के चलते अफ्रीका यूनिट में 45% की ग्रोथ देखी गई, जिससे अमेरिका के मार्केट में पकड़ मजबूत हुई है। इसके अलावा, Matrix Design & Industries के अधिग्रहण और BRFL Textiles (BTPL) में हिस्सेदारी खरीदने से कंपनी अपनी सप्लाई चेन को दुरुस्त कर रही है। Nike, Adidas और H&M जैसे बड़े ब्रांड्स कंपनी के साथ दशकों से जुड़े हैं।
मार्जिन पर दबाव का रिस्क
अच्छे रेवेन्यू के बावजूद कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव साफ दिखा है। कंपनी का EBITDA मार्जिन पिछले साल के 12.1% से घटकर 11.8% रह गया है। इसकी मुख्य वजह बढ़ती मजदूरी, लॉजिस्टिक्स का खर्च और कच्चे माल की कीमतों में उछाल है। अब मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे इन खर्चों को ग्राहकों पर कितना डाल पाते हैं।
निवेशकों के लिए अन्य चिंताएं
ऑपरेटिंग खर्चों के अलावा, कंपनी के सामने दो और बड़े रिस्क हैं। पहला, अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी और महंगाई का असर अपैरल एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण, कंपनी के प्रमोटर्स के पास 96% से ज्यादा शेयर गिरवी (Pledge) रखे हुए हैं, जो कि गवर्नेंस को लेकर चिंता पैदा करता है। निवेशक अब सितंबर में होने वाली AGM का इंतजार कर रहे हैं, जहां कर्ज कम करने और प्रमोटर प्लेज को लेकर कोई बड़ा अपडेट मिल सकता है।
