दुनिया भर के बड़े वित्तीय संस्थान भारत की कंपनियों की कमाई को लेकर अभी भी बुलिश (Bullish) हैं। हालांकि, इनपुट लागत (Input Costs) बढ़ने से थोड़ी दिक्कतें हैं, लेकिन उनका मानना है कि आने वाले समय में भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत रहेगा।
क्यों है ग्लोबल ब्रोकरेज का भरोसा?
वेस्ट एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के बावजूद, ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि भारतीय कंपनियों की कमाई का सफर अभी जारी रहेगा। बाजार में हालिया उठापटक के बावजूद, बड़े वित्तीय संस्थान निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे तत्काल उतार-चढ़ाव के बजाय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक गति पर ध्यान दें।
रेवेन्यू (Revenue) में कितनी ग्रोथ की उम्मीद?
विश्लेषक अभी इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि कंपनियों का टॉप-लाइन ग्रोथ (Top-line Growth) कितना मजबूत रहता है, जो आर्थिक मजबूती का एक बड़ा पैमाना है। जून तिमाही के अनुमानों के मुताबिक, बाजार में अच्छी खासी गतिविधि देखने की उम्मीद है। जेफरीज (Jefferies) जैसी फर्मों का अनुमान है कि तेल, गैस और धातुओं जैसे अस्थिर सेक्टर्स को छोड़ दें तो पिछले कई सालों में सबसे ज्यादा रेवेन्यू ग्रोथ देखने को मिल सकती है। फिलिप कैपिटल (Phillip Capital) और जेपी मॉर्गन (JPMorgan) जैसे अन्य संस्थानों के अनुमान भी इसी ओर इशारा करते हैं, जो डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। इस मजबूती का मुख्य कारण घरेलू खपत (Domestic Consumption) और उच्च नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) स्तर हैं, जो कंपनियों को सहारा देंगे, भले ही प्रॉफिट ग्रोथ (Profit Growth) में कुछ नरमी दिख रही हो।
मार्जिन (Margin) पर क्या होगा असर?
आने वाली कमाई के सीजन में प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) सबसे बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। बढ़ी हुई माल ढुलाई लागत (Freight Costs) और महंगी कमोडिटी की कीमतें (Commodity Prices) कई इंडस्ट्रीज में बॉटम-लाइन प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव डाल सकती हैं। हालांकि, बाजार इसे एक स्थायी समस्या के बजाय एक अस्थायी दौर मान रहा है। इन दबावों को ध्यान में रखते हुए, HSBC जैसी फर्मों ने फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के लिए अर्निंग्स ग्रोथ अनुमानों (Earnings Growth Estimates) को पहले ही कम कर दिया है। यह बताता है कि बाजार शायद इन लागतों का एक हिस्सा पहले ही मान चुका है, जिससे नतीजों के दौरान किसी बड़े निगेटिव सरप्राइज का असर कम हो सकता है।
कौन से सेक्टर्स दिखाएंगे दम?
वित्तीय संस्थान उन खास सेक्टर्स को उजागर कर रहे हैं जो ग्रोथ के अगले चरण का नेतृत्व कर सकते हैं। बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं (Banking and Financial Services) अभी भी टॉप रिकमेंडेशन में हैं, जिसका कारण लगातार क्रेडिट डिमांड और मजबूत हुई कंपनियों की बैलेंस शीट है। इसके अलावा, कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) से जुड़े सेक्टर्स जैसे इंडस्ट्रील्स (Industrials), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Consumer Durables) और ऑर्गनाइज्ड रिटेल (Organized Retail) पर भी बारीकी से नजर रखी जा रही है कि वे ग्रोथ को कैसे बनाए रखते हैं। जहां डोमेस्टिक साइक्लिकल्स (Domestic Cyclicals) को लेकर उम्मीदें ऊंची हैं, वहीं कुछ सावधानी सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) सेक्टर को लेकर भी बरती जा रही है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) पर ग्लोबल खर्च में नरमी आ सकती है। फार्मा (Pharma) सेक्टर में भी रिकवरी के संकेत दिखने लगे हैं, जिससे कुछ विश्लेषकों का रुख तटस्थ हो गया है। निवेशक फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में इनपुट लागतों में नरमी के बीच मार्जिन रिकवरी की वास्तविक गति का अंदाजा लगाने के लिए इन विशिष्ट सेक्टर्स के प्रदर्शन पर नजर रख सकते हैं।
