Geojit Financial Services ने ONGC पर बुलिश रुख अपनाते हुए ₹297 का टारगेट प्राइस सेट किया है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट तो शानदार रहा, लेकिन प्रोडक्शन में आई गिरावट चिंता का विषय है।
दमदार मुनाफे की इनसाइड स्टोरी
जून 2026 में खत्म हुई पहली तिमाही के नतीजों में ONGC ने शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 112.3% बढ़कर ₹17,034 करोड़ पर पहुंच गया है। इस तूफानी ग्रोथ के पीछे मुख्य वजह कच्चे तेल और गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी है। कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 45.2% बढ़कर ₹46,460 करोड़ रहा, जिसमें नोमिनेटेड फील्ड्स से रियलाइजेशन $99.45 प्रति बैरल तक पहुंच गया।
प्रोडक्शन का पेच
मुनाफा जरूर बढ़ा है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी थोड़ी अलग है। कंपनी के ऑपरेशनल डेटा पर नजर डालें तो क्रूड ऑयल का प्रोडक्शन 4.9% गिरकर 4.45 मिलियन मीट्रिक टन रह गया, वहीं नेचुरल गैस का प्रोडक्शन भी 1.9% घटकर 4.76 बिलियन क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। यानी मुनाफे की गाड़ी 'प्राइसिंग' के इंजन से तो चली, लेकिन 'वॉल्यूम' का साथ नहीं मिला।
ब्रोकरेज की चेतावनी और आगे की राह
Geojit Financial Services ने 'Sum-of-the-Parts' मॉडल का इस्तेमाल करते हुए यह टारगेट सेट किया है। हालांकि, ब्रोकरेज ने कुछ रिस्क फैक्टर भी गिनाए हैं:
- ऑपरेशनल चुनौतियां: KG-98/2 रिजर्वोयर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में देरी का असर प्रोडक्शन टारगेट्स पर पड़ सकता है।
- कच्चे तेल की कीमतें: मुनाफा ग्लोबल क्रूड प्राइसेज पर बहुत ज्यादा निर्भर है, ऐसे में कीमतों में सुधार मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
- रेगुलेटरी रिस्क: पुराने आर्बिट्रेशन मामलों और फिस्कल इंप्लिकेशंस पर नजर रखना निवेशकों के लिए जरूरी है।
अब निवेशक इस बात पर नजर बनाए रखें कि क्या ONGC नई फील्ड्स से प्रोडक्शन बढ़ाने में कामयाब हो पाती है या नहीं।
