GQG Partners का बड़ा दांव: AI की रेस में शामिल होने के लिए बढ़ाई Tech हिस्सेदारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
GQG Partners का बड़ा दांव: AI की रेस में शामिल होने के लिए बढ़ाई Tech हिस्सेदारी

दिग्गज निवेशक राजीव जैन की GQG Partners ने अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव किया है। AI शेयरों से दूरी बनाने वाली यह कंपनी अब तेजी से टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश बढ़ा रही है, ताकि पिछले कुछ महीनों के खराब प्रदर्शन और **$36 अरब** की भारी निकासी की भरपाई की जा सके।

लंबे समय तक डिफेंसिव रुख अपनाने के बाद, GQG Partners के लीड पोर्टफोलियो मैनेजर राजीव जैन ने अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजी में बड़ा यू-टर्न लिया है। जो कंपनी पहले AI को एक 'बबल' (बुलबुला) मान रही थी, उसने अब टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारी निवेश शुरू कर दिया है।

पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव

अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक, GQG के इमर्जिंग मार्केट्स फंड ने टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी को तीन गुना बढ़ाकर 35% कर दिया है। इसी तरह, कंपनी के फ्लैगशिप इंटरनेशनल इक्विटी फंड में भी टेक होल्डिंग्स 5.4% से उछलकर 28% पर पहुंच गई हैं। इस निवेश के लिए कंपनी ने भारत और ब्राजील जैसे मार्केट्स में अपनी हिस्सेदारी कम की है, जिसका असर वहां के बाजारों में थोड़ी अस्थिरता (volatility) के रूप में भी दिखा।

क्यों लिया यह फैसला?

यह बदलाव कंपनी के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर के बाद आया है। साल 2025 के मध्य से अब तक कंपनी को $36 अरब की रिडेम्पशन (निकासी) का सामना करना पड़ा है, क्योंकि कंपनी का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर रहा था। पिछले एक साल में कंपनी का रिटर्न 12% रहा, जबकि बेंचमार्क ने 21% का रिटर्न दिया।

राजीव जैन ने माना कि कंप्यूटिंग पावर की जबरदस्त मांग और क्लाउड कंपनियों के बढ़ते मुनाफे को देखते हुए उनकी पिछली गणना गलत साबित हुई। हालांकि, JPMorgan Chase & Co. के एनालिस्ट्स का मानना है कि इस अचानक बदलाव से कंपनी के मौजूदा क्लाइंट्स नाराज हो सकते हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म में और फंड आउटफ्लो का जोखिम बना रह सकता है। अब देखना यह है कि क्या यह रणनीति कंपनी के एसेट्स को स्थिर कर पाएगी या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.