GMR Airports के लिए अगस्त **2026** का महीना सुस्त रहा, जहां ऑर्गेनिक पैसेंजर ट्रैफिक में **2.6%** की कमी आई। इसकी मुख्य वजह हैदराबाद एयरपोर्ट पर वॉल्यूम में **11.5%** की गिरावट रही, लेकिन एक्सपर्ट्स अभी भी पॉजिटिव बने हुए हैं।
अगस्त 2026 में GMR Airports का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। कंपनी के ऑर्गेनिक पैसेंजर ट्रैफिक में सालाना आधार पर 2.6% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, नागपुर और भोगपुरम जैसे नए एसेट्स को जोड़ने के बाद कुल ट्रैफिक में 1% की मामूली बढ़त देखी गई, लेकिन कोर बिजनेस के मोर्चे पर चुनौतियां बरकरार रहीं।
गिरावट की मुख्य वजह
इस सुस्ती का सबसे ज्यादा असर GMR Hyderabad International Airport पर दिखा, जहां पैसेंजर ट्रैफिक में 11.5% की बड़ी गिरावट आई। कंपनी के पूरे नेटवर्क की बात करें तो डोमेस्टिक ट्रैवल में करीब 4% की कमी आई है। सेक्टर की चुनौतियां और वेस्ट एशिया में चल रहे जियो-पॉलिटिकल तनाव का असर एयर ट्रैवल डिमांड पर साफ दिख रहा है।
इंटरनेशनल सेगमेंट में राहत
पूरी खबर खराब नहीं है—इंटरनेशनल पैसेंजर सेगमेंट में 1.4% की मजबूती देखने को मिली है। यह कंपनी के लिए बेहद अहम है क्योंकि इसी से फूड एंड बेवरेज, रिटेल और ड्यूटी-फ्री जैसे नॉन-एरोनॉटिकल रेवेन्यू सोर्सेज को सपोर्ट मिलता है।
क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्टॉक में अब तक की कमजोरी का असर पहले ही भाव में दिख चुका है। नवंबर 2026 तक ट्रैफिक का वॉल्यूम सुस्त रहने की उम्मीद है, लेकिन दिसंबर से रिकवरी की पूरी संभावना है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले साल की शुरुआत से आंकड़े सुधरेंगे क्योंकि तब बेस इफेक्ट (Base Effect) का फायदा मिलेगा, क्योंकि पिछले साल IndiGo जैसी बड़ी एयरलाइन्स के ऑपरेशंस में दिक्कतें आई थीं। अब निवेशकों की नजर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन और दिसंबर तक होने वाली रिकवरी पर बनी हुई है।
