Fortis Healthcare Share: ब्रोकरेज ने दिया ₹1,050 का टारगेट, जानें क्या है निवेशकों के लिए बड़ी बात

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Fortis Healthcare Share: ब्रोकरेज ने दिया ₹1,050 का टारगेट, जानें क्या है निवेशकों के लिए बड़ी बात

ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Fortis Healthcare पर भरोसा जताते हुए ₹1,050 का टारगेट प्राइस सेट किया है। कंपनी अपने **1,800** बेड के विस्तार प्लान पर काम कर रही है, साथ ही हालिया ऑडिट संबंधी गतिविधियों के बीच भी कंपनी का ग्रोथ आउटलुक मजबूत बना हुआ है।

ब्रोकरेज हाउस Prabhudas Lilladher ने Fortis Healthcare के भविष्य पर भरोसा जताते हुए इसे ₹1,050 का प्राइस टारगेट दिया है। इस उत्साह की मुख्य वजह कंपनी का शानदार ऑपरेशनल प्रदर्शन और भविष्य के लिए तैयार की गई आक्रामक ग्रोथ स्ट्रैटेजी है। अस्पताल श्रृंखला अपनी बेड क्षमता बढ़ाने और मार्जिन्स सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है।

नतीजों में दिखी मजबूती

कंपनी के हालिया फाइनेंशियल रिजल्ट्स भी ब्रोकरेज की इस राय को बल देते हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹2,545 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 17.5% अधिक है। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹273 करोड़ दर्ज किया गया। विश्लेषकों का मानना है कि बेहतर केस-मिक्स और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार के चलते यह ग्रोथ हासिल हुई है।

विस्तार की नई योजनाएं

Fortis Healthcare का लक्ष्य अगले चार से पांच वर्षों में लगभग 1,800 नए बेड जोड़ने का है। कंपनी का लॉन्ग टर्म टारगेट फाइनेंशियल ईयर 2028 तक 25% का कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन हासिल करना है। साथ ही, पैरेंट प्रमोटर IHH Healthcare का समर्थन कंपनी के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है, जिसने 2030 तक अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51% करने की बात कही है।

रेगुलेटरी ऑडिट पर सफाई

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सिंह बंधुओं से संबंधित ऐतिहासिक शेयर ट्रांजेक्शन के लिए दिए गए 6 महीने के फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि इस ऑर्डर का मौजूदा कामकाज या विस्तार योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इससे कंपनी पर कोई वित्तीय लायबिलिटी नहीं आती है।

निवेशकों के लिए जरूरी बातें

आने वाली तिमाहियों में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने 1,800 बेड के विस्तार को कितनी तेजी से पूरा करती है। इसके अलावा, नए यूनिट्स के खर्च और कर्मचारी स्टॉक विकल्पों (ESOPs) के दबाव के बीच मार्जिन को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.