निवेशकों के लिए Equirus Wealth की सलाह है कि मार्केट की दिशा समझने के लिए US चुनाव के नतीजों से ज्यादा ग्लोबल इन्फ्लेशन और कंपनी की कमाई यानी अर्निंग्स पर नजर रखें। टेलीकॉम सेक्टर पर ब्रोकरेज बुलिश है, जबकि IT सेक्टर में सिलेक्टिव रहने की सलाह दी गई है।
चुनाव नहीं, फंडामेंटल्स पर करें फोकस
Equirus Wealth के हेड, अमित बिवलकर का मानना है कि राजनीतिक घटनाएं अक्सर मार्केट में सिर्फ थोड़े समय के लिए हलचल पैदा करती हैं, लेकिन वे लंबे समय तक बाजार की दिशा तय नहीं करतीं। निवेशकों को असल में ग्लोबल इन्फ्लेशन, फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले और कंपनियों के क्वार्टरली नतीजों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
टेलीकॉम सेक्टर में दिख रही है मजबूती
भारत में डिजिटल एडॉप्शन तेजी से बढ़ रहा है, जिसका सीधा फायदा टेलीकॉम कंपनियों को मिल रहा है। कंपनी का एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) बढ़ रहा है। अगर कंपनियां अपनी प्राइसिंग और कैपिटल स्पेंडिंग पर अनुशासन बनाए रखती हैं, तो यह सेक्टर आगे चलकर बहुत मजबूत कैश जेनरेटिंग बिजनेस बन सकता है।
IT सेक्टर में बरतें सावधानी
IT सेक्टर को लेकर नजरिया थोड़ा सतर्क रहने का है। डिमांड में अभी भी काफी उतार-चढ़ाव है। हालांकि, AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का शोर जरूर है, लेकिन बाजार अब उन्हीं कंपनियों को तरजीह दे रहा है जो दिखा रही हैं कि वे अपने प्रोजेक्ट्स से कितनी कमाई कर रही हैं। उन IT कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है जिनके क्लाइंट्स के साथ पुराने और मजबूत रिश्ते हैं।
रिस्क और चुनौतियां
निवेशकों को वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव पर भी नजर रखनी होगी, क्योंकि इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। क्रूड ऑयल महंगा होने से भारत में इन्फ्लेशन बढ़ सकती है, जो अंततः ब्याज दरों को प्रभावित करेगी। लंबी अवधि में भारत के प्रति विदेशी निवेशकों का भरोसा बना रहेगा, बशर्ते रेगुलेटरी नियमों में स्थिरता और टैक्स प्रणाली में सरलता बनी रहे।
