Emkay Wealth Management के CIO आशीष रानावाड़े के मुताबिक, Q2FY27 के नतीजे मिले-जुले रह सकते हैं। बढ़ती एनर्जी और कच्चे माल की लागत कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को चुनौती दे रही है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
मुनाफे पर क्यों है खतरा?
आगामी Q2FY27 अर्निंग सीजन कॉरपोरेट जगत के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। आशीष रानावाड़े का मानना है कि कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती कमोडिटी और एनर्जी की लागत है। जब कंपनियां कच्चे माल का अधिक खर्च ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं, तो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित कर रही है।
रुपये की गिरावट में छिपी उम्मीद
हालांकि बाजार में कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन कमजोर रुपया उन कंपनियों के लिए राहत लेकर आया है जो बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट करती हैं। रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती से इन कंपनियों की ओवरसीज कमाई में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जो परिचालन लागत (operational cost) के बोझ को कम करने में मदद करेगी।
किन सेक्टरों में है दम?
मैक्रो चुनौतियों के बीच, एरोस्पेस, डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों में स्ट्रक्चरल ग्रोथ की संभावनाएं दिख रही हैं। ये सेक्टर सरकारी 'इंपोर्ट सब्स्टिट्यूशन' पहलों का लाभ उठा रहे हैं। वहीं, जो निवेशक स्थिरता की तलाश में हैं, वे फार्मा, स्पेशलिटी केमिकल्स और टेक्सटाइल जैसे डिफेंसिव सेक्टरों पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि इनकी मांग में निरंतरता बनी रहती है।
निवेशकों के लिए सलाह
आशीष रानावाड़े की राय में, निवेशकों को केवल मार्केट कैप के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए। बदलती ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी के दौर में, अब समय आ गया है कि निवेशक रिस्क-एडजस्टेड अवसरों पर फोकस करें। आने वाले हफ्तों में मैनेजमेंट की कमेंट्री बहुत महत्वपूर्ण होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि कंपनियां कच्चे माल की लागत को कैसे मैनेज कर रही हैं और आने वाली तिमाहियों के लिए उनका क्या आउटलुक है।
