Dodla Dairy ने अपनी ग्रोथ रफ्तार तेज करने के लिए कमर कस ली है। कंपनी अब कर्ड और आइसक्रीम जैसे हाई-मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ा रही है और महाराष्ट्र व युगांडा में अपनी प्रोसेसिंग क्षमता में **15 लाख लीटर प्रति दिन** का इजाफा करने जा रही है।
हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स पर फोकस
Dodla Dairy ने आने वाले समय में 15% रेवेन्यू ग्रोथ हासिल करने के लिए एक बड़ी रणनीति तैयार की है। कंपनी अब अपने प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव कर रही है। फिलहाल कंपनी की कुल बिक्री में वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स (जैसे दही, छाछ, फ्लेवर्ड मिल्क और आइसक्रीम) की हिस्सेदारी 30% है, जिसे कंपनी बढ़ाकर 40% तक ले जाने की तैयारी में है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि ये प्रोडक्ट्स कमोडिटी मिल्क के मुकाबले बेहतर मुनाफा (मार्जिन) देते हैं।
क्षमता विस्तार की तैयारी
इस ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए कंपनी अगले तीन वर्षों में अपनी प्रोसेसिंग क्षमता में 15 लाख लीटर प्रति दिन (LLPD) की बढ़ोतरी करने वाली है। इसमें सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र में बन रहे 10 LLPD के नए प्लांट का होगा, जो महाराष्ट्र के अलावा उत्तर कर्नाटक और तेलंगाना की मांग को भी पूरा करेगा। इसके साथ ही, पूर्वी भारत में 'Osam' ब्रांड के जरिए कंपनी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, जिससे 3 LLPD की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी।
इंटरनेशनल और रिस्क फैक्टर्स
कंपनी FY29 तक युगांडा में भी अपना नया ग्रीनफील्ड प्लांट शुरू करने की तैयारी में है। हालांकि यह विस्तार कंपनी के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है, लेकिन निवेशकों को डेरी सेक्टर के रिस्क को नहीं भूलना चाहिए। डेरी बिजनेस पूरी तरह से कच्चे दूध की खरीद लागत पर निर्भर करता है। अगर दूध की खरीद लागत बढ़ती है, तो कंपनियों के लिए इसे ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो जाता है, जिसका सीधा असर प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ता है। साथ ही, महाराष्ट्र और युगांडा जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में एग्जीक्यूशन रिस्क और लागत बढ़ने की संभावना भी बनी रहती है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
