Dixon Technologies के शेयरों में आज जबरदस्त खरीदारी दिखी। मोतीलाल ओसवाल द्वारा टारगेट प्राइस बढ़ाकर **₹15,900** किए जाने के बाद स्टॉक **13%** तक उछल गया। हालांकि, निवेशकों की नजर कंपनी के **48.7%** गिरे मुनाफे पर भी टिकी है।
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Dixon Technologies पर अपना भरोसा जताते हुए टारगेट प्राइस को ₹15,400 से बढ़ाकर ₹15,900 कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ लंबी अवधि में मजबूत बनी रहेगी।
मिले-जुले नतीजे
FY27 की दूसरी तिमाही के आंकड़ों पर गौर करें तो कंपनी ने 47% की सालाना रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹21,806 करोड़ का आंकड़ा पार किया है। मोबाइल सेगमेंट में शानदार प्रदर्शन रहा, जहां मैन्युफैक्चरिंग वॉल्यूम 29% बढ़कर 97 लाख यूनिट्स तक पहुंच गया। हालांकि, दूसरी तरफ नेट प्रॉफिट 48.7% गिरकर ₹343.7 करोड़ रह गया, जिसके पीछे मार्जिन दबाव और फेयर वैल्यू गेन्स में बदलाव प्रमुख कारण रहे।
मार्जिन पर दबाव क्यों?
इन्वेस्टर्स के लिए चिंता का मुख्य विषय मार्जिन में गिरावट है। EBITDA मार्जिन घटकर 2.7% से 3.1% के दायरे में आ गया है। इसके दो बड़े कारण हैं—सरकारी मोबाइल PLI-1 स्कीम का खत्म होना और मेमोरी कंपोनेंट्स की ग्लोबल कीमतों में हुई बढ़ोतरी, जिसने प्रोडक्शन कॉस्ट को काफी बढ़ा दिया है। अब बाजार इस बात पर नजर रखे हुए है कि कंपनी बढ़ती इनपुट कॉस्ट के बीच अपना मुनाफा कैसे बनाए रखेगी।
आगे का रास्ता और रिस्क
मार्जिन की चुनौतियों के बावजूद मैनेजमेंट ने स्केल पर फोकस बनाए रखा है। FY27 के लिए स्मार्टफोन वॉल्यूम गाइडेंस 3.3 से 3.4 करोड़ यूनिट्स पर बरकरार है (इसमें Vivo के साथ नए जॉइंट वेंचर का हिस्सा शामिल नहीं है)। आने वाले समय में कंपनी की नजर बैकवर्ड इंटीग्रेशन और IT हार्डवेयर एवं टेलीकॉम डिवीजन को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की है।
निवेशकों को इनपुट कॉस्ट की अस्थिरता और स्मार्टफोन की मांग में किसी भी तरह की सुस्ती पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये स्टॉक के परफॉर्मेंस पर असर डाल सकते हैं।
