Dixon Technologies के शेयर सोमवार को करीब 12% तक उछल गए। कंपनी का दूसरी तिमाही का रेवेन्यू **47%** बढ़कर **₹21,806 करोड़** पर पहुंच गया है, हालांकि मार्जिन दबाव के कारण नेट प्रॉफिट में **45%** की गिरावट दर्ज की गई है।
मुनाफे पर दबाव, लेकिन रेवेन्यू ने भरी उड़ान
Dixon Technologies के नतीजों पर बाजार का रिएक्शन काफी सकारात्मक रहा। कंपनी ने दूसरी तिमाही में ₹21,806 करोड़ का शानदार रेवेन्यू दर्ज किया है, जो साल-दर-साल आधार पर 47% की बड़ी बढ़त है। हालांकि, दूसरी तरफ कंपनी का नेट प्रॉफिट 45% घटकर ₹411 करोड़ रह गया है, जो मार्केट में बढ़ते कॉम्पिटिशन और मार्जिन पर दबाव को साफ दर्शाता है।
आनंद राठी का नजरिया और टारगेट
नतीजों के बाद ब्रोकरेज हाउस Anand Rathi ने स्टॉक पर अपना बुलिश रुख बरकरार रखा है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹18,000 का टारगेट प्राइस सेट किया है। जानकारों का मानना है कि कंपनी का मोबाइल फोन सेगमेंट—जो कुल रेवेन्यू का 92% हिस्सा है—और नए जॉइंट वेंचर्स आने वाले समय में बड़ी ग्रोथ इंजन साबित हो सकते हैं।
मार्जिन और ऑपरेशनल चुनौतियां
कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन इस तिमाही में गिरकर 2.7% रह गया है। इसकी मुख्य वजह मेमोरी कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें और कुछ सरकारी PLI (Production Linked Incentive) बेनेफिट्स का हटना है। कंपनी Vivo, Gemtek और HKC जैसी बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी करके डेटा सेंटर और हार्डवेयर जैसे नए सेक्टर्स में अपना डायवर्सिफिकेशन कर रही है।
हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि कंपनी का बिजनेस मॉडल वर्किंग कैपिटल (Working Capital) पर काफी निर्भर है। साथ ही, सरकारी इंसेंटिव मिलने में देरी और ग्लोबल कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर असर डाल सकते हैं। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपनी नई पार्टनरशिप्स के जरिए मार्जिन को वापस कैसे पटरी पर लाती है।
