Dhoot Transmission का IPO आज खुल गया है, जिसका लक्ष्य ₹829–₹871 प्रति शेयर के प्राइस बैंड में ₹3,067 करोड़ जुटाना है। पहले दिन IPO 0.37 गुना सब्सक्राइब हुआ। पब्लिक लॉन्च से पहले, कंपनी ने BlackRock जैसे ग्लोबल फंड्स सहित एंकर निवेशकों से ₹918.27 करोड़ जुटाए थे। यह IPO 12 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा।
Dhoot Transmission IPO: पहले दिन का हाल
Dhoot Transmission Limited का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) आज, 10 अगस्त 2026 को बाजार में दस्तक दे चुका है। कंपनी इस IPO के जरिए बाजार से ₹3,067 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। निवेशकों के लिए शेयरों की बोली लगाने की कीमत ₹829 से ₹871 प्रति शेयर रखी गई है। पहले दिन की दोपहर तक, यह इश्यू 0.37 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। इस IPO में ₹1,400 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹1,667 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है।
एंकर निवेशकों का भरोसा
पब्लिक सब्सक्रिप्शन शुरू होने से पहले ही, Dhoot Transmission ने एंकर निवेशकों से ₹918.27 करोड़ की अच्छी-खासी रकम जुटा ली थी। इस लिस्ट में BlackRock और Abu Dhabi Investment Authority जैसे बड़े ग्लोबल नामों के साथ-साथ कई डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स भी शामिल हैं। मार्केट पार्टिसिपेंट्स ऐसे बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की भागीदारी को कंपनी के बिजनेस मॉडल पर भरोसे का संकेत मानते हैं।
कंपनी का बिजनेस और पैसों का इस्तेमाल
Dhoot Transmission ऑटोमोटिव वायरिंग हार्नेस बनाने में माहिर है, जो वाहनों के लिए बेहद ज़रूरी इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स होते हैं। कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) की बढ़ती मांग का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि इन सिस्टम्स में पारंपरिक इंटरनल कम्बशन इंजन वाले वाहनों की तुलना में अलग और ज़्यादा कॉम्प्लेक्स वायरिंग की ज़रूरत होती है।
IPO से जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत होगी। बाकी फंड्स का उपयोग हरियाणा और तमिलनाडु में दो नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए किया जाएगा। इसका मकसद ऑटो सेक्टर से आने वाली संभावित मांग को पूरा करने के लिए प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाना है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर
जहां एक ओर कंपनी विस्तार कर रही है, वहीं निवेशकों को ऑटोमोटिव एंसिलरी सेक्टर से जुड़े जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। वायरिंग हार्नेस की डिमांड सीधे तौर पर टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर निर्माताओं की प्रोडक्शन साइकिल से जुड़ी होती है। इन व्हीकल सेगमेंट्स में बिक्री में मंदी आने पर कंपनी के रेवेन्यू और प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने में एग्जीक्यूशन रिस्क भी है। इन यूनिट्स को लगाने में किसी भी तरह की देरी या कंस्ट्रक्शन के दौरान अप्रत्याशित लागत वृद्धि कंपनी की वित्तीय योजनाओं पर दबाव डाल सकती है। बिजनेस में कॉपर और प्लास्टिक जैसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता भी अहम है। यह IPO 12 अगस्त 2026 को बंद होगा, और NSE और BSE पर लिस्टिंग 17 अगस्त 2026 के आसपास होने की उम्मीद है।
