हाल ही में शेयर बाजार में लिस्ट हुई Deepa Jewellers अब अपने कारोबार को रफ्तार दे रही है। कंपनी अपने IPO से जुटाए गए **₹250 करोड़** के फंड का इस्तेमाल हैदराबाद में एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी शुरू करने में कर रही है।
इन-हाउस प्रोडक्शन से बढ़ेगा मुनाफा
अब तक Deepa Jewellers आउटसोर्सिंग मॉडल पर काम करती थी, जहां बाहरी कारीगरों के जरिए जेवर तैयार होते थे। लेकिन अब 6,700 स्क्वायर फीट की नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के साथ कंपनी खुद प्रोडक्शन संभालेगी। इस कदम का मकसद उन मार्जिन को बचाना है जो अभी तक थर्ड-पार्टी मैन्युफैक्चरर्स को जाते थे। इससे न केवल क्वालिटी पर बेहतर कंट्रोल मिलेगा, बल्कि कंपनी 22 नए स्टॉक-कीपिंग यूनिट्स (SKUs) भी लॉन्च कर सकेगी।
फाइनेंशियल सेहत और IPO का असर
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने ₹1,926.7 करोड़ का रेवेन्यू और ₹104.8 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। IPO से मिले फ्रेश फंड से कंपनी का कर्ज कम होगा और फाइनेंशियल स्थिति मजबूत होगी।
निवेशकों के लिए चेतावनी के संकेत
कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:
- क्लाइंट कंसंट्रेशन: वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का 64.67% रेवेन्यू टॉप 10 ग्राहकों से आया था। इसका मतलब है कि अगर किसी बड़े रिटेल चेन ने अपना बिजनेस मॉडल बदला, तो कंपनी के मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता है।
- क्षेत्रीय निर्भरता: कंपनी का कामकाज मुख्य रूप से दक्षिण भारत तक ही सीमित है, जो इसे क्षेत्रीय आर्थिक मंदी के प्रति संवेदनशील बनाता है।
- कमोडिटी जोखिम: सोने और हीरे की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने नए प्लांट को कितनी कुशलता से चलाती है और क्या वे बड़े क्लाइंट्स के अलावा अपने ग्राहक आधार को भी तेजी से बढ़ा पाते हैं या नहीं।
