Dalmia Bharat को मौजूदा तिमाही में बढ़ते खर्चों और सीमेंट सेक्टर में तगड़ी कॉम्पिटिशन के चलते कम मार्जिन की उम्मीद है। कंपनी **₹13,500 करोड़** के बड़े एक्सपेंशन प्लान पर काम कर रही है, लेकिन इस दौरान कर्ज और नई संपत्तियों को मैनेज करना बड़ी चुनौती है।
भारतीय सीमेंट बाजार में Dalmia Bharat इस वक्त एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। बढ़ती ऑपरेशनल लागत और बाजार में प्राइसिंग को लेकर मची होड़ का सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ रहा है। चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में मार्जिन में गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना कंपनी के लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
अनुमान है कि यूनिट ऑपरेटिंग खर्च में ₹250 से ₹300 प्रति मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे मार्जिन गिरकर ₹750 प्रति मीट्रिक टन के आसपास रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा पिछली तिमाहियों के मुकाबले कमजोर है, जो पूरे सीमेंट सेक्टर में चल रही इन्फ्लेशन और कॉम्पिटिशन को दर्शाता है।
एक्सपेंशन और एसेट इंटीग्रेशन
इन अल्पकालिक मुश्किलों के बावजूद, कंपनी का मैनेजमेंट अपने बड़े एक्सपेंशन प्लान पर अडिग है। कंपनी अपनी कुल कैपेसिटी को 67 मिलियन टन तक ले जाने की तैयारी में है। इस रणनीति का एक अहम हिस्सा भिलाई जेपी सीमेंट (Bhilai Jaypee Cement) की संपत्तियों को शामिल करना है, जिसमें छत्तीसगढ़ में 2.2 मिलियन टन का ग्राइंडिंग यूनिट और मध्य प्रदेश में 1.1 मिलियन टन का क्लिंकर फैसिलिटी शामिल है। फिलहाल इस डील पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।
भारी खर्च और कर्ज का गणित
निवेशकों की नजर कंपनी के कैपिटल एलोकेशन पर टिकी है। कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2027 से 2029 के बीच ₹13,500 करोड़ खर्च करने की योजना बना रही है। इस भारी निवेश के कारण फाइनेंशियल ईयर 2027 तक नेट डेट-टू-EBITDA रेशियो 2.5x के स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, मैनेजमेंट का फोकस चौथी तिमाही में 40% और 2028 तक 60% कैपेसिटी यूटिलाइजेशन हासिल करने पर है, लेकिन इतनी बड़ी पूंजी के निवेश के साथ बैलेंस शीट को संभालना कंपनी के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
आने वाले समय में भिलाई जेपी सीमेंट के साथ इंटीग्रेशन की टाइमलाइन और सीमेंट की कीमतों में स्थिरता कंपनी के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगी।
