Corporate Credit: मजबूती के बावजूद IBC में **70%** का भारी हेयरकट, निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Corporate Credit: मजबूती के बावजूद IBC में **70%** का भारी हेयरकट, निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

कॉर्पोरेट इंडिया का क्रेडिट साइकिल मजबूत बना हुआ है, लेकिन इंसॉल्वेंसी प्रोसेस में देरी और **70%** तक का हेयरकट लेंडर्स के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

भारतीय कंपनियों का क्रेडिट आउटलुक फिलहाल स्थिर बना हुआ है। इसकी मुख्य वजह कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट और बाहरी कर्ज पर कम निर्भरता है। कंपनियां अब अपने विस्तार के लिए नए कर्ज लेने के बजाय इंटरनल कैश फ्लो का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे डिफॉल्ट का रिस्क कम हो गया है।

इंसॉल्वेंसी में देरी की बड़ी चुनौती

हालांकि कॉर्पोरेट हेल्थ अच्छी है, लेकिन फंसे हुए कर्ज (Stressed Assets) को निपटाने की प्रक्रिया काफी सुस्त है। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 76% कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) तय 270 दिन की समय सीमा को पार कर चुके हैं। इस देरी के कारण संपत्तियों की वैल्यू लगातार कम हो रही है, जिसका सीधा असर रिकवरी पर पड़ रहा है।

70% हेयरकट का गणित

रिकवरी के आंकड़े बताते हैं कि लेंडर्स अपनी कुल क्लेम राशि का केवल 31% ही वापस पा पा रहे हैं, यानी औसतन 70% का भारी हेयरकट झेलना पड़ रहा है। यह ट्रेंड हाल के बड़े केसेज में भी देखा गया है जहां बैंकों को कर्ज का एक छोटा हिस्सा ही मिल पाया है।

बदलाव की बयार और रिस्क

अच्छी खबर यह है कि अब लिक्विडेशन के बजाय रिजॉल्यूशन की तरफ ज्यादा झुकाव दिख रहा है। रिजॉल्यूशन-टू-लिक्विडेशन रेश्यो रिकॉर्ड 1.28 पर पहुंच गया है। विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सफल रिजॉल्यूशन प्लान की हिस्सेदारी 40% है। फिलहाल सिस्टमिक रिस्क कम है, लेकिन 3,000 से ज्यादा पेंडिंग केस और रेगुलेटरी रिफॉर्म्स की कमी भविष्य के लिए बड़े मॉनिटरेबल पॉइंट्स हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.