ब्रोकरेज फर्म Nomura ने Cipla के सितंबर तिमाही के नतीजों के लिए अपना आउटलुक जारी किया है। कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पिछली तिमाही के **16.7%** से बढ़कर **19.2%** पर पहुंचने की उम्मीद है, जिसका मुख्य श्रेय 'One-India' बिजनेस में नई पार्टनरशिप को जाता है।
सितंबर तिमाही के नतीजों से पहले ब्रोकरेज फर्म Nomura ने Cipla को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। फर्म ने EBITDA मार्जिन 19.2% रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के 16.7% से कहीं बेहतर है। इस सुधार के पीछे सेल्स वॉल्यूम बढ़ाने और खर्चों पर सख्त नियंत्रण की रणनीति है।
'One-India' का दम
कंपनी के लिए 'One-India' सेगमेंट सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है। इसमें low-to-mid-teen की सालाना दर से ग्रोथ की उम्मीद है। Pfizer के साथ डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनरशिप, Inzepra का इंटीग्रेशन और वजन घटाने की दवा 'tirzepatide' की लाइसेंसिंग जैसे कदम कंपनी की ग्रोथ में 6% तक का योगदान दे सकते हैं। ये रणनीतिक बदलाव पुराने पोर्टफोलियो में आती सुस्ती को संतुलित करने में मदद कर रहे हैं।
चुनौतियां और ग्लोबल मार्केट
जहां भारत में कंपनी चमक रही है, वहीं कोर थेरेपी जैसे कि रेस्पिरेटरी और एंटी-इन्फेक्टिव दवाओं में ग्रोथ की रफ्तार धीमी होकर 'low single digit' पर आ गई है। इंटरनेशनल फ्रंट पर साउथ अफ्रीका के बिजनेस में सरकारी टेंडर खोने और प्रमोशनल कॉस्ट से जुड़े अकाउंटिंग बदलावों के कारण दिक्कतें बरकरार हैं। वहीं, अमेरिका में भी कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते नए लॉन्च से फिलहाल बहुत बड़ी उम्मीदें नहीं हैं।
निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या कंपनी अपने 18.5% से 20% के सालाना मार्जिन गाइडेंस पर कायम रह पाती है या नहीं।
