Q2 FY27 में Indian Cement Industry में **8.5%** की वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन बढ़ती ऑपरेशनल कॉस्ट मुनाफे पर भारी पड़ रही है। सीमेंट की कीमतों में मामूली बढ़त के बावजूद, यह प्रति टन **₹115** की बढ़ती लागत को कवर करने के लिए नाकाफी साबित हो रही है।
भारतीय सीमेंट सेक्टर इस समय डिमांड और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच एक कश्मकश से गुजर रहा है। हालांकि सेक्टर सेल्स वॉल्यूम के मामले में मजबूत दिख रहा है, लेकिन एनालिस्ट्स का मानना है कि बढ़ती इनपुट कॉस्ट और कीमतों में मामूली उछाल के बीच कंपनियों का बॉटम लाइन प्रभावित हो सकता है।\n\nइस तिमाही के लिए प्रोजेक्टेड वॉल्यूम ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले 8.5% रहने का अनुमान है। इस मांग को देरी से आए मानसून का भी साथ मिला, जिससे कंस्ट्रक्शन गतिविधियां उम्मीद से ज्यादा समय तक जारी रहीं। हालांकि, पूर्वी भारत में भारी बारिश और बाढ़ के कारण सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने इन फायदों को कुछ हद तक सीमित कर दिया है।\n\n### प्राइस और कॉस्ट का अंतर\n\nसीमेंट कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाए रखने की है। सितंबर में सीमेंट की कीमतों में प्रति बैग करीब ₹11 की मामूली बढ़त देखी गई, लेकिन यह बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट को संभालने के लिए काफी नहीं है।\n\nसीक्वेंशियल आधार पर ऑपरेशनल खर्च में प्रति टन ₹115 का इजाफा होने का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह पेट कोक (pet coke) और कोयले जैसी एनर्जी कॉस्ट का बढ़ना है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग का खर्च भी बढ़ा है। नतीजतन, प्रति टन Ebitda के ₹880 से नीचे रहने की आशंका है, जो पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 4.9% की गिरावट को दर्शाता है।\n\n### निवेशकों को क्या देखना चाहिए?\n\nबावजूद इसके, लंबी अवधि की मांग स्थिर बनी हुई है। Brokerage रिपोर्ट्स Ambuja Cements, Nuvoco Vistas, Birla Corporation, और JK Lakshmi Cement जैसी कंपनियों पर बारीकी से नजर रखने की सलाह दे रही हैं।\n\nनिवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर कितना डाल पाती हैं और कौन सी कंपनियां मार्केट शेयर बचाने के लिए इस खर्च को खुद उठा रही हैं। इसके अलावा, ग्लोबल एनर्जी प्राइस, खासकर थर्मल कोल और पेट कोक की कीमतें भी इस सेक्टर के लिए क्रिटिकल वॉच लिस्ट में रहेंगी।
