विश्लेषक रोहन शाह ने Canara Bank, Bank of India और Union Bank of India के शेयरों के लिए टेक्निकल चार्ट्स के आधार पर संभावित प्राइस मूवमेंट का सुझाव दिया है। ये PSU बैंक फिलहाल प्राइवेट बैंकों से पिछड़ रहे हैं, ऐसे में निवेशकों को इनके सपोर्ट लेवल पर खास नजर रखनी होगी।
Canara Bank: सपोर्ट लेवल क्या हैं?
Canara Bank के शेयर फिलहाल ₹127 के करीब कारोबार कर रहे हैं। टेक्निकल एनालिसिस के मुताबिक, ₹120 से ₹125 के बीच एक मजबूत सपोर्ट जोन दिख रहा है। यह रेंज स्टॉक के 100-हफ्ते के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के आसपास है, जिसे अक्सर ट्रेडर्स लंबी अवधि के प्राइस ट्रेंड को समझने के लिए इस्तेमाल करते हैं। अगर स्टॉक इन लेवल्स को बनाए रखता है, तो यह ₹138 से ₹145 की रेंज की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, ₹120 के सपोर्ट से नीचे गिरना इस आउटलुक को बदल सकता है।
Bank of India: कंसॉलिडेशन का दौर
Bank of India ₹145 पर ट्रेड कर रहा है और हालिया गिरावट के बाद अपने 50-हफ्ते के EMA के पास स्थिर होता दिख रहा है। बाजार पर नजर रखने वाले ₹135 के लेवल को स्टॉक के लिए एक महत्वपूर्ण फ्लोर मान रहे हैं। MACD जैसे इंडिकेटर्स, जो प्राइस ट्रेंड की ताकत और दिशा को मापते हैं, जीरो लाइन के आसपास हैं, जो बताता है कि बिकवाली का दबाव कम हो सकता है। यदि स्टॉक ₹148 से ऊपर बना रहता है, तो टेक्निकल इंडिकेटर्स ₹160 और ₹168 के रेजिस्टेंस लेवल की ओर इशारा कर रहे हैं।
Union Bank of India: प्रदर्शन कैसा?
Union Bank of India ने हाल ही में अपनी पहली तिमाही (Q1) में पिछले साल की तुलना में नेट प्रॉफिट में लगभग 30% की बढ़ोतरी दर्ज की है। साथ ही, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 10% की वृद्धि हुई है। यह शेयर फिलहाल ₹171 पर है और इसने ₹158–₹162 की रेंज में एक सपोर्ट बेस बनाया है, जो बढ़ते 50-हफ्ते के मूविंग एवरेज और अपवर्ड-ट्रेंडिंग प्राइस लाइन से मजबूत हो रहा है। अगर यह सपोर्ट लेवल बना रहता है, तो एनालिस्ट ₹195 के लेवल पर वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।
आगे क्या?
टेक्निकल इंडिकेटर्स जहां प्राइस ट्रेंड की एक झलक देते हैं, वहीं निवेशक इन मूवमेंट्स की स्थिरता को समझने के लिए फंडामेंटल्स पर भी ध्यान देते हैं। PSU बैंकों के सामने ऐतिहासिक रूप से एसेट क्वालिटी की चुनौतियां रही हैं, हालांकि हाल के वर्षों में बैलेंस शीट सुधारने के प्रयास किए गए हैं। इन बैंकों का प्रदर्शन मैक्रो फैक्टर्स जैसे इंटरेस्ट रेट साइकिल, सरकारी बैंकिंग नीतियां और भारतीय अर्थव्यवस्था में क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। इन स्टॉक्स को ट्रैक करने वाले निवेशक इस बात पर नजर रख सकते हैं कि ये टेक्निकल सपोर्ट लेवल बाजार की अस्थिरता के बीच कैसे टिकते हैं और अगली तिमाही के नतीजों में एसेट क्वालिटी या क्रेडिट विस्तार को लेकर क्या अपडेट आते हैं।
